Friday, January 30, 2026

आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में किसानों को लेकर कुछ नहीं: सपा सांसद अवधेश प्रसाद


नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को वित्तीय वर्ष 2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया, जिसको लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में किसानों के लिए कुछ नहीं है।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “वित्त मंत्री ने आज सदन में आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें किसानों के लिए कुछ नहीं है। किसान हमारा अन्नदाता है। हमारे देश के करीब 72 फीसदी लोग कृषि से जुड़े हैं। जब तक हमारा किसान खुशहाल नहीं होगा, तब तक हमारा देश खुशहाल नहीं हो सकता। सरकार 2047 में देश को जहां पर देखना चाहती है, ऐसा लगता है कि वे झूठ बोल रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।

सपा सांसद ने विकसित भारत-जी रामजी विधेयक को लेकर कहा, “यह पहले मनरेगा था, जो करीब 20 वर्ष पुरानी योजना थी। यह योजना मजदूर वर्ग के लिए थी। 20 साल पहले जो मजदूरी थी, तब से आज तक हमारी मुद्रा की क्रय शक्ति घटी है। इसके फलस्वरूप महंगाई बढ़ी है। भारत में सोना और चांदी की कीमत महंगी हो गई है, जितनी दुनिया के किसी और देश में नहीं है। सभी चीजें महंगी हो गई हैं। अगर सही मायने में सरकार किसानों की हितैषी है, तो वे सबसे पहले किसानों और श्रमिकों की मजदूरी को आज की महंगाई के हिसाब से बढ़ाए।”

उन्होंने कहा, “वहीं, आज के समय में करोड़ों किसान श्रमिक ऐसे हैं, जिन्होंने मेहनत और मजदूरी की है, लेकिन उन्हें उसका भुगतान नहीं मिला है। इनकी संख्या सैकड़े और हजारों में नहीं बल्कि करोड़ों में है। आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है, तो इसका मतलब यह माना जाए कि मजदूरों ने जो काम किया है, उसका भुगतान होने वाला नहीं है।”

सपा सांसद ने कहा, “सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उन्होंने योजना के तहत कार्यदिनों की संख्या बढ़ाकर 125 दिन की है। देश के अधिकांश श्रमिक ऐसे हैं, जो दूसरे राज्यों में जाकर अपना जीविकोपार्जन करते हैं, ऐसे में 125 दिन की जगह इनकी संख्या 200 करनी चाहिए थी। सरकार को पिछला भुगतान पूरा कराना चाहिए और भुगतान को आज के जमाने के हिसाब से करना चाहिए था।”

–आईएएनएस

एससीएच/डीएससी


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