सौरव घोषाल: दिग्गज स्क्वैश खिलाड़ी, जो बने अनुशासन, मेहनत और सफलता की मिसाल


नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। भारत के दिग्गज स्क्वैश खिलाड़ियों में शुमार सौरव घोषाल ने अपने करियर में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं, जिनकी मेहनत, निरंतरता और दबाव में शानदार प्रदर्शन ने भारतीय स्क्वैश को नई पहचान दिलाई है।

भारतीय खेल जगत के सम्मानित और प्रेरणादायक खिलाड़ियों में गिने जाने वाले सौरव घोषाल का जन्म 10 अगस्त 1986 को कोलकाता में हुआ था। सौरव ने कोलकाता रैकेट क्लब में स्क्वैश खेलना शुरू किया। स्कूली शिक्षा के बाद वह चेन्नई स्थित आईसीएल स्क्वैश एकेडमी पहुंचे, जहां इस खेल की बारीकियां सीखीं।

सौरव घोषाल अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान खींच रहे थे। उन्होंने साल 2003 में पीएसए में डेब्यू किया और 18 बार फाइनल खेले। इस दौरान 10 बार खिताब जीता। नवंबर 2021 में उन्होंने मलेशियन ओपन स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में विजय हासिल करते हुए अपना अंतिम पीसीएस खिताब जीता।

साल 2004 में सौरव ब्रिटिश जूनियर ओपन अंडर-19 स्क्वैश खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। साल 2006 में उन्होंने दोहा एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।

सौरव घोषाल ने साल 2013 में वर्ल्ड स्क्वैश चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई और ऐसा करने वाले पहले भारतीय बने। साल 2014 में उन्होंने एशियन गेम्स के सिंगल्स इवेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया था। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय रहे।

साल 2018-19 में सौरव घोषाल वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-10 में पहुंचने वाले पहले भारतीय बने। कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में उन्होंने सिंगल्स और मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज जीते। इसी साल वर्ल्ड डबल्स चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स इवमेंट में दीपिका पल्लीकल के साथ गोल्ड जीता। पीएसए टूर पर 511 में से 281 मैच जीतने वाले सौरव घोषाल ने अप्रैल 2024 में पेशेवर स्क्वैश से संन्यास ले लिया।

स्क्वैश में उत्कृष्ण योगदान के लिए सौरव घोषाल को साल 2007 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इस दिग्गज खिलाड़ी ने युवाओं को सिखाया है कि सफलता के लिए प्रतिभा के साथ अनुशासन, धैर्य और निरंतर मेहनत जरूरी है। कठिन परिस्थितियों में हार न मानने और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की उनकी सोच युवाओं को प्रेरित करती है।

–आईएएनएस

आरएसजी


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