मरम्मत के लिए 42 साल बाद विश्राम लेगा संजय सेतु, कल से आवागमन बंद, पीपा पुल बना विकल्प

वर्ष 1980 में बाराबंकी बहराइच मार्ग पर घाघरा नदी के ऊपर पुल का निर्माण शुरु हुआ, वहीं 1981 में यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने निर्माण की आधारशिला रखी। निरंतर काम चलते रहने के बाद वर्ष 1984 में यह पुल लोक सेवा में आ गया। पहले तो नहीं पर गुजरे डेढ़ दशक में इस पुल पर यातायात का बोझ 40 गुना ज्यादा हो गया है। नदी में बाढ़ की ठोकरें मजबूत खंभों का तो कुछ नहीं बिगाड़ सकीं लेकिन वाहनों का बढ़ता दबाव संजय सेतु की कमर हिला गया।

42 साल तक वाहनों का कई गुना बोझ ढोते उम्रदराज हुआ संजय सेतु गुरुवार से आवागमन के लिए बंद हो जाएगा। केवल सेवा देते आ रहे पुल की अब मरम्मत के जरिए सेवा की जाएगी। इस बीच छोटे वाहनों का आना जाना पीपा पुल से तो बड़े वाहनों का गुजरना डायवर्जन से होगा। 

नतीजा यह कि समय समय पर पुल के ऊपरी हिस्से में कंपन्न, जोड़ों में दरार व मरम्मत के बावजूद कमियां बनी रहने जैसी समस्याएं आने लगीं। संकेत मिला कि पुल को आराम व मरम्मत की जरूरत है। इसी के मद्देनजर करीब साढ़े छह करोड़ की लागत से पुल के नजदीक ही पीपा पुल बनाया गया है। जिनसे होकर कार, जीप, एंबुलेंस, वैन व छोटे वाहन सीमित रफ्तार से गुजरेंगे। वहीं कल यानी 16 अप्रैल से संजय सेतु पर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। एनएचआई के अवर अभियंता अनंत मौर्य ने बताया कि बुधवार देर रात तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। 

बताया कि पुल का अलग से ट्रायल नहीं किया गया, लेकिन निर्माण के दौरान ही भारी वाहनों से सामग्री लाकर उसकी मजबूती परख ली गई है। गुरुवार से संजय सेतु को बंद कर पीपा पुल से आवागमन शुरू कर दिया जाएगा। राज्य सड़क परिवहन निगम ने 16 अप्रैल से अगले दो माह तक बसों का संचालन वैकल्पिक मार्ग से करने का निर्णय लिया है। इस दौरान लखनऊ व देवीपाटन क्षेत्र की करीब 100 बसें परिवर्तित रूट से चलेंगी।

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