संग्राम सिंह ने लगाई जीत की हैट्रिक, अर्जेंटीना में एमएमए मुकाबला जीतने वाले पहले भारतीय बने


ब्यूनस आयर्स, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय एमएमए स्टार संग्राम सिंह ने ब्यूनस आयर्स में इतिहास रच दिया। वह अर्जेंटीना की धरती पर एमएमए मुकाबला जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। उन्होंने टाइगर स्पोर्ट्स क्लब स्टेडियम में खचाखच भरी भीड़ के सामने फ्रांस के फाइटर फ्लोरियन कौडियर को सिर्फ 1 मिनट 45 सेकंड में हराकर शानदार जीत दर्ज की।

यह जीत संग्राम की एमएमए में लगातार तीसरी जीत थी। इससे पहले उन्होंने त्बिलिसी और एम्स्टर्डम में भी जीत हासिल की थी। इस मुकाबले में उनकी मजबूत कुश्ती की नींव बहुत काम आई। इसकी बदौलत वह मुकाबले की गति को अपने हिसाब से तय कर पाए और एक त्वरित ‘सबमिशन’ (विरोधी को हार मानने पर मजबूर करना) के साथ मुकाबला खत्म कर दिया। जीत के बाद भारतीय पहलवान संग्राम सिंह ने कहा, “मैं या तो जीतता हूं या सीखता हूं। जुनून की कोई उम्र नहीं होती। यह जीत अर्जेंटीना में एमएमए मुकाबला जीतने वाले पहले भारतीय बनने के मेरे सपने को पूरा करती है।” उन्होंने अपने लंबे समय के कोच भूपेश के प्रति भी आभार व्यक्त किया और भारत तथा विदेशों में अपने प्रशंसकों से मिले समर्थन को भी सराहा।

इस मुकाबले की तैयारी का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। मुकाबले से ठीक दो दिन पहले संग्राम का वजन तय सीमा से 600 ग्राम ज्यादा था। हालांकि, कड़े अनुशासन और जोरदार तैयारी की बदौलत वह भारी शारीरिक और मानसिक दबाव के बावजूद 83 किलोग्राम वर्ग में अपना वजन तय सीमा के भीतर लाने में कामयाब रहे। मुकाबले की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों ने एक-दूसरे पर हमले किए, लेकिन संग्राम की कुश्ती की सहज समझ ने जल्द ही स्थिति को अपने नियंत्रण में ले लिया। एक मौका मिलते ही उन्होंने फ्लोरियन कौडियर को जमीन पर ला दिया और जबरदस्त ‘सबमिशन होल्ड’ से मुकाबले को अपने नाम कर लिया।

संग्राम सिंह की इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए लेगेक्सी के सह-संस्थापक और टैलेंट डायरेक्टर अनीश गौतम ने कहा, “यह भारतीय एमएमए के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षण है। तीन अलग-अलग महाद्वीपों में संग्राम की जीत यह दर्शाती है कि भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स एथलीट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने और जीतने के लिए कितने तैयार हैं।”

संग्राम सिंह ने अपने प्रदर्शन का श्रेय अपने मानसिक अनुशासन और एक नियमित दिनचर्या को दिया, जिसमें योग और प्राणायाम शामिल हैं। उन्होंने युवा एथलीटों को भी अपने लक्ष्यों को पाने के लिए समर्पित और दृढ़ रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने समुराई फाइट हाउस के आयोजकों के साथ-साथ रितु छाबड़िया, जितेंद्र सिंह, देवव्रत सरकार, नितिन अग्रवाल, मनोज अत्री, संजीव गुप्ता और अपनी पूरी सपोर्ट टीम के समर्थन को भी सराहा। उन्होंने इन सभी को इस उपलब्धि को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का श्रेय दिया।

–आईएएनएस

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