बच्चों की नियमित ग्रोथ मॉनिटरिंग जरूरी, मिलती है विकास की सही जानकारी


नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। बच्चों की सही परवरिश और अच्छे विकास के लिए सिर्फ अच्छा खाना देना ही काफी नहीं होता, बल्कि यह भी जानना जरूरी होता है कि बच्चा सही तरीके से बढ़ रहा है या नहीं। इसी को समझने के लिए ग्रोथ मॉनिटरिंग यानी नियमित विकास की निगरानी बहुत जरूरी मानी जाती है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर बताया कि ग्रोथ मॉनिटरिंग का मतलब होता है बच्चे की लंबाई, वजन और उम्र के हिसाब से उसके विकास को समय-समय पर मापना और उसका रिकॉर्ड रखना। इससे पता चलता है कि बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से ठीक से बढ़ रहा है या नहीं। अगर किसी भी तरह की कमी या समस्या होती है, तो उसे शुरू में ही पहचाना जा सकता है और समय रहते इलाज या सुधार किया जा सकता है।

अक्सर गांवों और छोटे शहरों में लोग इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन बच्चे के पहले पांच साल सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान अगर विकास में कोई कमी रह जाए, तो उसका असर आगे की पूरी जिंदगी पर पड़ सकता है। इसलिए हर माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चे का वजन और लंबाई नियमित रूप से जांचते रहें।

ग्रोथ मॉनिटरिंग से यह भी समझ में आता है कि बच्चे को सही पोषण मिल रहा है या नहीं। अगर बच्चा उम्र के हिसाब से कमजोर दिख रहा है या उसका वजन कम बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि उसके खाने-पीने में सुधार की जरूरत है। वहीं अगर बच्चा तेजी से सही तरीके से बढ़ रहा है, तो यह एक अच्छा संकेत होता है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर भी यह सुविधा दी जाती है, जहां बच्चों का नियमित रूप से वजन और लंबाई मापी जाती है। वहां स्वास्थ्य कार्यकर्ता माता-पिता को यह भी बताते हैं कि बच्चे की डाइट कैसी होनी चाहिए और किस चीज की कमी है।

ग्रोथ मॉनिटरिंग का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे कुपोषण की पहचान जल्दी हो जाती है। कई बार बच्चा बाहर से ठीक दिखता है, लेकिन अंदर से कमजोर हो सकता है। ऐसे में समय पर पहचान बहुत जरूरी होती है ताकि उसका सही इलाज किया जा सके।

इसके अलावा, यह प्रक्रिया माता-पिता को भी जागरूक बनाती है। जब वे हर महीने या कुछ समय बाद अपने बच्चे की ग्रोथ चार्ट देखते हैं, तो उन्हें समझ आता है कि उनका बच्चा सही दिशा में बढ़ रहा है या नहीं।

–आईएएनएस

पीआईएम/एएस


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