Sunday, February 15, 2026

मनरेगा पर रामगोपाल ने सरकार को घेरा, बोले, 'महात्मा गांधी से भाजपा को क्यों परेशानी?'


नई दिल्ली, 17 दिसंबर (आईएएनएस)। मनरेगा का नाम बदलने पर सियासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। समाजवादी सांसद गोपाल यादव ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने और उसे बदलने की क्या जरूरत थी? भाजपा को क्या परेशानी है?

सपा सांसद राम गोपाल यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “सच तो यह है कि जो बिल वे ला रहे हैं, वह पहले से ही मौजूद था, तो महात्मा गांधी का नाम हटाने और उसे बदलने की क्या जरूरत थी? जब गांधी जी को गोली मारी गई थी, तब उनके आखिरी शब्द ‘हे राम’ थे, वे राम विरोधी नहीं थे। महात्मा गांधी कई लोगों से ज्यादा धार्मिक थे। इस देश में किसी ने भी इस तरह से इतना गहरा योगदान नहीं दिया है और शायद भविष्य में भी कोई नहीं देगा।”

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के जैसा न तो देश में कोई पैदा हुआ था और न ही अब होने वाला है। इसके बाद भी भाजपा को इनसे क्या परेशानी है, यह समझ में नहीं आ रहा है।

विकसित भारत जी राम जी बिल पर राम गोपाल यादव ने कहा, “मनरेगा को प्रभावी ढंग से कम कर दिया गया है। 40 प्रतिशत फंडिंग कौन देगा? राज्यों के पास फंड नहीं है और आप उन पर दबाव डाल रहे हैं। व्यवस्था यह थी कि राज्य केवल 10 प्रतिशत देंगे और केंद्र 90 प्रतिशत देता है। हालांकि, अब उन्होंने अपने ही भाजपा सदस्यों से सलाह लिए बिना इसे लागू कर दिया है।”

एसआईआर पर उन्होंने कहा, “एसआईआर में चार कैटेगरी हैं—मृत वोटर, स्थायी रूप से विस्थापित वोटर, जिनका पता नहीं चल रहा है और डबल वोट। डबल वोटों को एक वोट में बदल दिया जाता है। अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिनका नाम एक जगह से काटा जा रहा है, वह दूसरे स्थान पर मतदाता सूची में अपना नाम डलवा पाए हैं कि नहीं। इसमें भी गड़बड़ी की जा सकती है, जैसे सरकार के दबाव में अधिकारी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में, अगर मुस्लिम वोटरों के नामों में स्पेलिंग में अंतर है, तो उन्हें ‘कैटेगरी सी’ में डालने की कोशिश की जा रही है। कैटेगरी सी में रखे जाने का मतलब है कि उन्हें नोटिस मिलेंगे जिसमें उनसे सबूत देने के लिए कहा जाएगा। बंगाल में, जहां वोट हटाए गए थे, यह एक बड़ा मुद्दा बन गया था, लगभग 62 लाख वोट प्रभावित हुए थे। उत्तर प्रदेश में, लगभग 4 करोड़ वोट शामिल हैं। हालांकि प्रक्रिया में अनियमितताएं हैं, अगर ईमानदार अधिकारी इंचार्ज हैं, तो हेरफेर की संभावना कम है, अगर बेईमान अधिकारी कंट्रोल में हैं, तो अनियमितताएं हो सकती हैं।”

–आईएएनएस

एसएके/एएस


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