नीति लागू होने के अपने आरंभिक चरण में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी निरंतर भारतीय भाषाओं में शिक्षा को लेकर आग्रही बने हुए हैं। ऐसे में संबंधित संस्थाओं पर इसकी बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। लिहाजा इन संस्थानों का दायित्व बनता है कि वे प्राचीन काल में हिंदी में विभिन्न विषयों पर लिखी गई मौलिक पुस्तकों की तलाश करें।