पंजाब में पिछले 5 से 6 साल के दौरान शिरोमणि अकाली दल जालंधर में काफी कमजोर साबित हुआ है। विधानसभा चुनाव 2017 से पहले और उसके बाद बड़ी तादाद में अकाली कार्यकर्ता अन्य दलों में शामिल हुए। हालांकि अकाली विचारधारा से प्रभावित कार्यकर्ता दूसरे राजनीतिक दलों में घुटन महसूस करते रहे हैं और वापसी का रास्ता भी देखते रहे हैं।
