नई दिल्ली, 18 (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिनमें स्वीडन का रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार भी शामिल है। उन्होंने भारत की विदेश नीति के फैसलों का बचाव करते हुए विपक्ष के रुख और अंतरराष्ट्रीय दौरों पर उठाए गए सवालों की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि इस यात्रा के पहले चरणों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की यूएई की यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात ने भारत से यह करार किया है कि वह हमारे रणनीतिक तेल रिजर्व में तीन करोड़ बैरल की वृद्धि करेगा। इससे भारत का रणनीतिक तेल रिजर्व और अधिक मजबूत हो जाएगा। इसका मतलब कि हमारी तेल संबंधी ऊर्जा की समस्या और अधिक उपयुक्त और प्रभावी हो जाएगी। इसके साथ ही यूएई की कंपनी ने भारत में भी पांच बिलियन डॉलर के निवेश की भी घोषणा की है, जिससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के द्वारा भारत के आर्थिक विकास को भी बल मिलेगा।
उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात ने ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का एक स्थायी अंतरसरकारी संगठन) से अलग कर लिया है। इसलिए यूएई अब स्वतंत्र रूप से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े फैसलें ले सकता है। ऐसे में हम यूएई से बात करके, द्विपक्षीय बात करके, अपने तेल संकट की समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर सकते हैं। दूसरी बात, वहां से आने वाले मार्ग में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की जरूरत नहीं पड़ेगी। अर्थात, वर्तमान समय में चुनौतियां हैं और संभावित घटनाएं यदि वैसा ही मोड़ लेती हैं, जैसा कि आसन्न संकट नजर आ रहा है, तो यह भारत के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
भाजपा नेता ने कहा कि इसके साथ एक दूसरा विषय है, जो भारत की दूसरी एक रणनीतिक आवश्यकता के लिए महत्वपूर्ण होता है। आज हम बड़े स्तर पर चिप का इस्तेमाल करते हैं, तो नीदरलैंड और स्वीडन के साथ जो समझौता हुआ है वह बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि चिप मैन्युफैक्चरिंग के तमाम कंपोनेंट्स में नीदरलैंड का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। अतः भारत को चिप के संदर्भ में स्वावलंबी बनाने में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
उन्होंने कहा कि 11वीं सदी के चौल साम्राज्य के कार्यकाल की ताम्र प्लेटें, जो एक हजार साल पुरानी भारत की प्राचीन सभ्यता और उसकी महानता और उसकी दक्षता का प्रमाण देती हैं…उनको भी वहां से वापस लाने का निर्णय लिया गया है। इसलिए हम यह कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह विदेश दौरा रणनीतिक लिहाज से (तेल की जरूरत), आर्थिक लिहाज से (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) और सांस्कृतिक दृष्टि से (चौल साम्राज्य काल की ताम्र प्लेटों का वापस आना) एक बड़ी उपलब्धि है।
–आईएएनएस
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