2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए शांति जरूरी : मिजोरम के राज्यपाल


आइजोल, 30 जून (आईएएनएस)। मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके. सिंह (रिटायर्ड) ने सोमवार को ‘रेमना नी’ (मिजोरम शांति समझौता दिवस) के मौके पर कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय विजन को साकार करने में स्थायी शांति अहम भूमिका निभाएगी।

30 जून 1986 को मिजोरम शांति समझौते (आधिकारिक तौर पर ‘मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट’ कहा जाता है) पर हस्ताक्षर होने से पूर्वोत्तर राज्य में दो दशकों से चल रहे विद्रोह और संघर्ष का अंत हुआ।

इस ऐतिहासिक समझौते के बाद, मिजोरम को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया और 20 फरवरी 1987 को यह केंद्र-शासित प्रदेश से भारत का 23वां राज्य बन गया।

ऐतिहासिक मिजोरम शांति समझौते की 40वीं वर्षगांठ पर राज्य के लोगों को बधाई देते हुए, राज्यपाल ने इस अवसर को राज्य के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ बताया। जनरल सिंह (रिटायर्ड) ने अपने संदेश में कहा, “यह दिन एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और विकसित मिजोरम के लिए हमारी सामूहिक उम्मीदों को नई ऊर्जा देता है। चालीस साल पहले, इस समझौते पर हस्ताक्षर ने हमारी धरती पर स्थायी शांति स्थापित की, वर्षों के संघर्ष को समाप्त किया और एकता, मेल-मिलाप तथा विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत की।”

उन्होंने कहा कि मिजोरम के लोग उन सभी लोगों को दिल से श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने राज्य में शांति स्थापित करने और उसे बनाए रखने में योगदान दिया। राज्यपाल ने कहा, “हमारे दूरदर्शी नेताओं, संगठनों, नागरिक समाज समूहों, चर्चों, बुजुर्गों और हर व्यक्ति ने मिजोरम के हित के लिए समझदारी, साहस और अटूट प्रतिबद्धता का परिचय दिया।”

उन्होंने कहा कि इस अवसर पर, लोग विशेष रूप से उन बहादुर लोगों को गहरे आभार के साथ याद करते हैं जिन्होंने मिजोरम के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी; आज यह राज्य देश के सबसे शांतिपूर्ण राज्यों में से एक माना जाता है। उनका बलिदान और बेहतर भविष्य के उनके सपने हमें प्रेरित करते रहते हैं।

राज्यपाल ने कहा कि शांति का अर्थ केवल संघर्ष का न होना नहीं है, बल्कि यह व्यक्तियों और राष्ट्रों की प्रगति के लिए एक बुनियादी जरूरत है। शांति और सद्भाव के बिना विकास की कोई भी सार्थक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

जनरल सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि शांति मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक मानदंडों और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी माहौल बनाती है। यह लोगों के बीच विश्वास, सहनशीलता और भाईचारे को बढ़ावा देती है। आज की अनिश्चितताओं और असमानताओं से भरी दुनिया में, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत का कोई विकल्प नहीं है।

राज्यपाल ने कहा कि जब मिजोरम इस ऐतिहासिक उपलब्धि का जश्न मना रहा है, तो लोगों को शांति के इस अनमोल उपहार को बनाए रखना चाहिए और उसे मजबूत करना चाहिए, साथ ही राज्य के समृद्ध सामाजिक ताने-बाने की रक्षा के लिए एकजुट और सतर्क रहना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सच्ची शांति ही शिक्षा, आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, सांस्कृतिक उन्नति, इनोवेशन, निवेश और समावेशी प्रगति के मामले में सर्वांगीण विकास का आधार होनी चाहिए। इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें अभी लंबा सफर तय करना है।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम


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