पटनाः बीजेपी ने आम चुनाव की जरूरत को देखते हुए नीतीश कुमार का साथ दिया है। बीजेपी नीतीश के बहाने अति पिछड़े वोट को अपने साथ जोड़कर रखना चाहती है। 2019 में राज्य की 40 लोकसभा सीट में 39 सीटों पर एनडीए ने जीत हासिल की थी। अब नीतीश के दोबारा एनडीए में आने पर बीजेपी उस प्रदर्शन को दोहराने या उससे बेहतर करने की कोशिश करेगी। लेकिन पार्टी की असली चुनौती आम चुनाव के बाद शुरू होगी। पार्टी को पता है कि नीतीश के प्रति एंटी इनकंबेसी को देखते हुए उनके साथ 2025 विधानसभा चुनाव में जाना आसान नहीं होगा। इसकी झलक 2020 विधानसभा चुनाव में देखने को मिल चुकी है। साथ ही इस बार साफ संकेत गया कि बिहार की राज्य इकाई नीतीश कुमार से फिर गठबंधन के पक्ष में नहीं थी। ऐसे में बीजेपी के लिए नीतीश कुमार के साथ सियासी संतुलन बनाकर रखना आसान नहीं होगा। लेकिन पार्टी की फिलहाल प्राथमिकता होगी कि अगले तीन महीने बिना किसी विवाद के सरकार चलाई जाए ताकि लोकसभा चुनाव में किसी तरह का प्रतिकूल संदेश नहीं जाए।
