लंदन, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। ब्रिटेन की कंजर्वेटिव पार्टी की सांसद केटी लैम ने यूके में ग्रूमिंग गैंग्स पर राष्ट्रीय जांच की मांग की है। इससे एक बड़े घोटाले की ओर ध्यान गया है, जिसमें पाकिस्तानी मूल के कुछ ब्रिटिश गैंग्स ने 1990 के दशक से लेकर 2010 के दशक तक कमजोर बच्चों (खासकर वाइट और सिख गर्ल्स) का लगातार शोषण किया। इससे रोदरहैम, रोचडेल और टेलफोर्ड जैसे शहरों में लोगों की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।
खालसा वॉक्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अपराधी 11 साल तक की छोटी लड़कियों को पार्क, बस स्टॉप या स्कूल जैसे आम जगहों पर निशाना बनाते थे। वे उन्हें मीठी बातें, शराब, ड्रग्स या छोटे-छोटे तोहफों के जरिए फंसाते थे। धीरे-धीरे भरोसा बनाकर उन्हें दबाव और डर में बदल देते थे। पीड़ित लड़कियों को फ्लैट्स या दुकानों में ले जाया जाता था, जहां कई लोग बार-बार उनका शोषण करते थे। उन्हें धमकाया जाता था कि अगर वे कुछ बताएंगी तो मारपीट होगी, घर जला दिया जाएगा या उनकी निजी वीडियो इंटरनेट पर डाल दी जाएंगी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि रोदरहम में 1997 से 2013 के बीच करीब 1,400 पीड़ितों के मामले सामने आए, जो इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। इनमें से कई लड़कियां कमजोर पारिवारिक स्थिति या देखभाल केंद्रों में रह रही थीं। टैक्सी ड्राइवर जैसे लोग, जो उनकी दिनचर्या जानते थे, उन्हें आसानी से निशाना बनाते थे। कई आरोपी डिलीवरी ड्राइवर या दुकानों में काम करने वाले आम लोगों की तरह दिखते थे और रात में खुलकर अपराध करते थे। इस दौरान कुछ बहुत दुखद घटनाएं भी हुईं, जैसे लूसी लोवे की हत्या, जबरन गर्भधारण और जिंदगी भर रहने वाली स्वास्थ्य समस्याएं।
रिपोर्ट के अनुसार, रोदरहम में कई वर्षों तक यह शोषण चलता रहा और 1991 से ही इसकी शिकायतें नजरअंदाज होती रहीं। अब “ऑपरेशन स्टोववुड” नाम की बड़ी जांच में 1,100 से ज्यादा पीड़ितों की पहचान हो चुकी है और इसके मुकदमे 2027 तक चलेंगे।
रोशडेल में 2012 में नौ लोगों को छोटी लड़कियों की तस्करी के लिए दोषी ठहराया गया था। रिपोर्ट में बताया गया कि एक लड़की के साथ एक रात में 20 लोगों ने शोषण किया। 2025 में सात और लोगों को सजा हुई, जिन्हें मिलाकर 174 साल की जेल दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, 1970 के दशक से टेलफोर्ड में गरीबी के कारण लगभग 1,000 लोग शोषण का शिकार हुए। ऑक्सफोर्ड में “ऑपरेशन बुलफिंच” के तहत 1998 से 2012 के बीच हुए मामलों में 22 लोगों को सजा मिली।
हडर्सफील्ड में 20 लोगों को 11 साल तक की लड़कियों के साथ 120 से ज्यादा बार दुष्कर्म के लिए दोषी पाया गया, जबकि न्यूकैसल में भी ऐसे कई मामले सामने आए। ग्रेटर मैनचेस्टर के आंकड़ों के मुताबिक, समूह में होने वाले शोषण के 52 प्रतिशत मामलों में एशियाई, खासकर पाकिस्तानी मूल के लोग शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस साल हाउंसलो में सिख समुदाय की एक रैली के दौरान करीब 200 लोगों ने मिलकर 16 साल की एक लड़की को बचाया, जिसे एक 34 साल के पाकिस्तानी व्यक्ति ने बंधक बनाकर उसका शोषण किया था। बताया गया कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की थी।
यह घटना दिखाती है कि जब संस्थाएं काम नहीं करतीं, तो लोग खुद आगे आकर मदद करते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए जागरूकता, सही डेटा, बेहतर ट्रेनिंग और पीड़ितों की बात सुनना बहुत जरूरी है। पीड़ित ही बदलाव लाने की मांग कर रहे हैं, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
–आईएएनएस
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