अफगानिस्तान के साथ संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर रहा पाकिस्तान : रिपोर्ट


इस्लामाबाद/काबुल, 29 मार्च (आईएएनएस)। अफगानिस्तान के साथ अपने संघर्ष में आत्मरक्षा का दावा करने वाले पाकिस्तान की पोल खुली है। एक रिपोर्ट में सामने आया है कि पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन कर रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अफगानिस्तान पर हमलों को लेकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानून से नहीं बच सकता है।

पाकिस्तान, अफगानिस्तान के साथ अपने संघर्ष में आत्मरक्षा का दावा करने के बावजूद, बल प्रयोग को नियंत्रित करने वाले अंतरराष्ट्रीय कानून की सख्त ज़रूरतों से बच नहीं सकता, खासकर किसी दूसरे देश के इलाके में। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन नियमों के तहत आनुपातिक जवाब देना और सैन्य तथा नागरिक लक्ष्यों के बीच स्पष्ट अंतर रखना ज़रूरी है।

अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून में ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जो किसी देश को किसी कथित सुरक्षा खतरे का पीछा करने के लिए दूसरे देश के इलाके पर हमला करने, नागरिक क्षेत्रों को तबाह होने के जोखिम में डालने और बाद में इसे सुरक्षा का तर्क देकर सही ठहराने की अनुमति देता हो। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि अगर ऐसी दलील मान ली जाती है, तो दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर जाएगी जहां हर देश यह कहकर पड़ोसी देशों पर बमबारी कर सकता है कि ‘हमारे पास सबूत हैं।’

रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के हफ्तों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर अपने हवाई हमले तेज कर दिए, जिनका सबसे ज्यादा खामियाजा आम नागरिकों, खासकर बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इन हमलों में काबुल के एक नशा मुक्ति केंद्र पर बमबारी सबसे चौंकाने वाली घटना रही। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस हमले में 143 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए। यह आंकड़ा किसी मानवीय त्रासदी से कम नहीं है।

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएएमए) का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि काबुल के नशा मुक्ति केंद्र पर हमले से तीन हफ्ते पहले पाकिस्तान के हमलों में अफगानिस्तान में कम से कम 70 लोग मारे गए थे, 478 अन्य घायल हुए थे और लगभग 115,000 लोग विस्थापित हुए थे।

इसमें आगे कहा गया है कि इस बढ़ते संघर्ष को लेकर वैश्विक स्तर पर गहरी और चिंताजनक चुप्पी बनी हुई है। एक तरफ अफगानिस्तान तालिबान की कठोर और दमनकारी नीतियों से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ सीमा पार से हो रहे हमलों का सामना कर रहा है। अफगानिस्तान के लोग एक तरह से दोहरी मार झेल रहे हैं। आजादी और सुरक्षा उनसे भीतर से छीन ली गई है, जबकि बाहर से उनकी सुरक्षा का खतरनाक तरीके से उल्लंघन किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का मौजूदा रवैया कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की लंबे समय से चली आ रही चुप्पी और चुनिंदा जवाबदेही का नतीजा है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 28 फरवरी से अब तक दुनिया का ध्यान अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर केंद्रित रहा है, जो अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान ईरान ने इजरायल और अमेरिका के हमलों के जवाब में उन देशों को निशाना बनाया है जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं, साथ ही खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बनाया गया है। ऐसे माहौल में अफगानिस्तान को एक बार फिर हाशिए पर धकेल दिया गया है।

यह भी चेतावनी दी गई है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की लगातार चुप्पी न सिर्फ अफगानिस्तान के प्रति एक नाकामी है, बल्कि यह एक ऐसे सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, जहां अपराधियों को सजा नहीं मिलती।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह एक खतरनाक मानक को सामान्य बना रहा है, जिसमें चिकित्सा केंद्रों और नागरिक क्षेत्रों पर बमबारी होती है, लेकिन क्योंकि पीड़ित एक अलग-थलग पड़े देश में रहते हैं, इसलिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह सिर्फ अफगानिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के लिए खतरा है। जब दंड का भय समाप्त हो जाता है, तो कानून अपना महत्व खोने लगता है।

–आईएएनएस

डीसीएच/


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