कोलंबो, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। पाकिस्तान सुधरने का नाम नाझी ले रहा है और अपने आतंकी नेटवर्क को लगातार फैला रहा है। इस क्रम में जैश-ए-मोहम्मद ने ‘जमात-उल-मोमिनात’ नाम से महिला विंग बनाई है, जबकि लश्कर-ए-तैयबा ने समुद्री हमलों की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से तथाकथित ‘वॉटर विंग’ की स्थापना की है। यह जानकारी बुधवार को एक रिपोर्ट में दी गई।
श्रीलंकाई मीडिया आउटलेट सीलोन वायर न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकवाद के वित्तपोषण के तरीके अब डिजिटल हो गए हैं, जहां एन्क्रिप्टेड क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन पारंपरिक हवाला नेटवर्क का पूरक बन रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह किसी कमजोर होते नेटवर्क का अंतिम चरण नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा पोषित इस तंत्र के विकासात्मक कदम हैं।
रिपोर्ट में पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी का जिक्र करते हुए कहा गया कि यह हमला पूरी तरह प्लान किया गया, सोचा-समझा और ठंडे दिमाग से अंजाम दिया गया था। यह हमला जम्मू-कश्मीर में सफल विधानसभा चुनावों के कुछ ही महीनों बाद हुआ था।
इस हमले से साफ है कि आतंकी संगठनों की रणनीति बदल रही है। अब उनका मकसद कश्मीर में बढ़ते पर्यटन को नुकसान पहुंचाना और वहां सामान्य हालात के दावों को चुनौती देना है।
रिपोर्ट में कहा गया, “जब कोई इलाका स्थिर होने लगता है, निवेश बढ़ता है और पर्यटक घूमने आते हैं, तब आतंकवाद सबसे बड़ा रुकावट बनता है। पाकिस्तान की गहरी सत्ता (डीप स्टेट) यह बात लंबे समय से समझती रही है कि कश्मीर में भारत की आर्थिक प्रगति को रोकने का सबसे असरदार तरीका पारंपरिक सेना नहीं, बल्कि ऐसे आतंकी समूह हैं जिनसे सीधे जुड़ाव से इनकार किया जा सके।”
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हमले में पाकिस्तान की सीधी भूमिका के सबूत पक्के हैं।
रिपोर्ट में कहा गया, “28 जुलाई 2025 को भारतीय सुरक्षा बलों ने श्रीनगर के पास हरवान के जंगलों में पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया। उनकी पहचान से साफ हुआ कि एक आतंकी हबीब ताहिर था, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के खैगला के पास कोइयां गांव का रहने वाला था। दूसरा बिलाल अफजल था। ये कोई बेनाम या अकेले काम करने वाले लोग नहीं थे, बल्कि सीमा पार से आए और प्रशिक्षित थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान का यही पैटर्न नजर आता है। 2026 के ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान शीर्ष पर है। साथ ही मार्च 2026 की अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तान कई पुराने आतंकी संगठनों का अड्डा बना हुआ है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया, “ऐसे कई मामले सामने आए हैं। मार्च 2026 में पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश में दोषी पाया गया। पाकिस्तानी मूल के मोहम्मद शाहजेब खान ने न्यूयॉर्क में एक यहूदी केंद्र पर हमले की साजिश में अपराध कबूल किया। अगस्त 2025 में लश्कर-ए-तैयबा का एक सदस्य दक्षिण कोरिया में गैरकानूनी तरीके से घुसने के बाद पकड़ा गया। इससे साफ है कि पाकिस्तान से जुड़ा आतंक दुनिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है।”
भारत के नजरिए से रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की रणनीति यह है कि जम्मू-कश्मीर में जब भी हालात सामान्य होने की ओर बढ़ें, तब किसी न किसी आतंकी हमले से वहां फिर से हिंसा फैला दी जाए।
–आईएएनएस
एवाई/वीसी
