रुबियो के दौरे के बाद ट्रंप ही भारत के साथ संबंध ठीक कर सकते हैं : लिसा कर्टिस (आईएएनएस इंटरव्यू)

[ad_1]

1779978248 957 2025021410f

वाशिंगटन, 28 मई (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी लिसा कर्टिस ने कहा है कि अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो के हालिया भारत दौरे से वाशिंगटन-नई दिल्ली के तनावपूर्ण संबंधों को स्थिर करने में मदद मिली, लेकिन सिर्फ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही दोनों देशों के संबंधों में पूरी तरह से भरोसा बहाल कर सकते हैं।

कर्टिस ने 2017 से 2021 तक राष्ट्रपति के उपसहायक और दक्षिण और मध्य एशिया के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ डायरेक्टर के तौर पर काम किया। उन्होंने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो के दौरे को ‘एक बैंड-एड जैसा’ बताया।

कर्टिस ने कहा, ”मुझे लगता है कि सचिव रुबियो का भारत जाना बहुत जरूरी था ताकि पिछले साल अमेरिका-भारत संबंधों को हुए कुछ नुकसान को ठीक करने की कोशिश की जा सके। मुझे लगता है कि उनके दौरे ने संबंधों पर एक तरह का बैंड-एड का काम किया।”

कर्टिस अभी सेंटर फॉर ए न्यू अमेरिकन सिक्योरिटी में हिंद-प्रशांत सुरक्षा प्रोग्राम की डायरेक्टर हैं। उन्होंने कहा कि रुबियो के दौरे के दौरान हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की मीटिंग बहुत सांकेतिक थी और यह दिखाती है कि ग्रुपिंग में अभी भी मोमेंटम था, भले ही लीडर्स मिले नहीं।

इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि पिछले साल हुई कई घटनाओं ने भारत को परेशान किया है, जिसमें टैरिफ, इमिग्रेशन पर रोक और पाकिस्तान के साथ वाशिंगटन की नजदीकियां शामिल हैं।

कर्टिस ने कहा, “यह सब भारतीय सोच में बसा हुआ है। मुझे लगता है कि इससे पता चलता है कि ट्रंप सरकार ने दूसरे कार्यकाल में भारत और भारत के साथ अपने संबंधों को पहले कार्यकाल की तरह प्राथमिकता नहीं दी है।”

कर्टिस ने कहा कि अब सिर्फ ट्रंप ही संबंधों में बड़े पैमाने पर सुधार ला सकते हैं।

उन्होंने कहा, “सिर्फ राष्ट्रपति ट्रंप ही असल में संबंधों को फिर से ठीक कर सकते हैं। मुझे लगता है कि तभी जब वह दिखाएंगे कि वह संबंधों को प्राथमिकता देते हैं और पिछले साल जो हुआ, उससे बेहतर देखना चाहते हैं।”

उन्होंने हाल की कुछ घटनाओं की ओर इशारा किया, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने उन्हें सकारात्मक तरीके से देखा है, जिसमें वाशिंगटन द्वारा भारत को रूसी तेल इंपोर्ट जारी रखने की छूट देना भी शामिल है।

कर्टिस ने यह भी कहा कि भारतीयों को इस बात की चिंता है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हाल ही में हुई समिट के बाद ट्रंप चीन के प्रति अपना रवैया नरम कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उस समिट के नतीजे ने शायद भारतीयों को यह विश्वास दिलाया है कि राष्ट्रपति ट्रंप चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बजाय व्यापार पर ध्यान दे रहे हैं।”

व्हाइट हाउस की पूर्व अधिकारी ने कहा कि ताइवान को हथियारों की बिक्री को बातचीत के सौदे की तरह इस्तेमाल किए जाने संबंधी टिप्पणियों ने पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।

क्वाड को लेकर कर्टिस ने कहा कि मंत्रीस्तरीय एंगेजमेंट सक्रिय रहा, लेकिन लीडर्स समिट के बिना संदेह बना रहा।

उन्होंने कहा, “पिछले साल हम लीडर-लेवल मीटिंग नहीं कर पाए। पांच साल में यह पहली बार था जब कोई लीडर-लेवल मीटिंग नहीं हुई।”

कर्टिस ने कहा कि ट्रंप का भारत आना या अमेरिका हिंद-प्रशांत रणनीति के लिए भारत की अहमियत पर सबके सामने जोर देना, भरोसा फिर से बनाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा, “सबसे अच्छी बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप भारत की अहमियत के बारे में बात करते रहें।”

चीन के इलाके में असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाला क्वाड समूह हिंद-प्रशांत रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है।

पिछले साल व्यापार तनाव, इमिग्रेशन की चिंताओं और बदलती क्षेत्रीय कूटनीति के कारण भारत-अमेरिका के संबंधों में उतार-चढ़ाव आया है। वाशिंगटन और नई दिल्ली के विश्लेषक इस बात पर करीब से नजर रखे हुए हैं कि क्या ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भी भारत पर वही रणनीतिक जोर बनाए रखा जाएगा, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल के समय था।

–आईएएनएस

केके/एबीएम

[ad_2]

Related Articles

Latest News