प्योंगयांग, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन और इंडोनेशिया के लिए नए राजदूत नियुक्त करने का ऐलान किया। करीब 10 वर्षों में यह पहली बार है जब प्रमुख राजनयिक केंद्रों पर उसके राजदूत बदले गए हैं।
मंगलवार को विदेश मंत्रालय ने बताया कि, मुन म्योंग-सिन को ब्रिटेन में प्योंगयांग का दूत नियुक्त किया गया है। उन्होंने अपने पूर्ववर्ती चो इल की जगह ली है। योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक दशक में यह पहला बड़ा फेरबदल है।
मुन पहले लंदन में उत्तर कोरियाई दूतावास में ते योंग-हो के साथ काम कर चुके हैं। ते योंग-हो भगोड़े घोषित किए जा चुके हैं। ते ने राजनयिक मिशन में उत्तर कोरियाई मंत्री के तौर पर काम किया था।
वहीं, उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने इंडोनेशिया में अपने नए शीर्ष दूत के तौर पर होंग क्वांग-इल की नियुक्ति का भी ऐलान किया। वह दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के राजदूत का पद भी संभालेंगे।
2015 के बाद पहली बार है जब उत्तर कोरिया ने इंडोनेशिया में तैनात अपने शीर्ष राजनयिक की नियुक्ति को लेकर कोई औपचारिक घोषणा की है।
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया ने 12 अप्रैल को बेलारूस में भी एक नया राजदूत भेजा है। इसे पिछले महीने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको की प्योंगयांग यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों का संकेत माना जा रहा है।
कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी के अनुसार, बाहरी आर्थिक संबंधों के पूर्व उप मंत्री जी क्योंग-सु ने लुकाशेंको को अपना परिचय पत्र सौंपा। इस समारोह के दौरान जी ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन की ओर से “शुभकामनाएं” दीं, जिसके लिए लुकाशेंको ने आभार व्यक्त किया।
लुकाशेंको ने 25 और 26 मार्च को उत्तर कोरिया का दौरा किया था और प्योंगयांग में किम के साथ शिखर वार्ता की थी। दोनों पक्षों ने मित्रता और सहयोग पर एक संधि की, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना है।
जानकारों का कहना है कि उत्तर कोरिया और बेलारूस एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं, क्योंकि दोनों देश कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से एक ही पक्ष में हैं, खासकर यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस के प्रति अपने समर्थन के मामले में।
बेलारूस की एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, बेलारूस 1 अगस्त तक उत्तर कोरिया में अपना दूतावास खोलने की योजना बना रहा है।
प्योंगयांग ने हाल ही में नाइजीरिया और ब्राजील में भी नए राजदूत नियुक्त किए हैं। इसके पीछे उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को पुनर्जीवित करना है, क्योंकि उसने राष्ट्रीय हितों पर आधारित विदेश नीति को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है।
–आईएएनएस
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