बाराबंकी-बहराइच हाईवे के निर्माण में अटका एनओसी का पेच, अलाइनमेंट बदला ताे टूटेंगे सैकड़ों मकान

बाराबंकी-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में वन विभाग से एनओसी मिलने में देरी हो रही है, जिससे परियोजना में विलंब हो सकता है।

बाराबंकी से बहराइच के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की हरी झंडी कैबिनेट से भले मिल गई हो, लेकिन वन विभाग की अनुमति मिलना बाकी है। अक्टूबर 2026 से काम शुरू होना है, लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक किए गए कई पत्राचार के बाद भी वन विभाग से एनओसी का इंतजार है।

बताया जा रहा है कि सेकेट्री फारेस्ट राज्य सरकार से क्लीयरेंस मिलना है। छह लेन के राष्ट्रीय राजमार्ग मुस्ताफाबाद से कैसरगंज होते हुए बहराइच तक जाएगा। इस रास्ते में वन विभाग की 70 हेक्टेयर जमीन है।वन विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग के अलाइनमेंट का बदलवाना चाहता है, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग के मार्ग में नौ हजार पेड़ आ रहे हैं, जिन्हें सड़क बनाते वक्त काटना ही पड़ेगा और कई हेक्टेअर जमीन भी जाएगी। वहीं, वन विभाग इस अलाइनमेंट को बदलवाने का प्रयास कर रहा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दावा किया है कि अक्टूबर 2027 तक बाराबंकी से बहराइच के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग बन जाएगा। सवाल खड़ा होता है कि वन विभाग की एनओसी व जमीन अधिग्रहण में अगर विलंब हुआ तो प्रोजेक्ट भी समय से शुरू नहीं हो पाएगा।

बाराबंकी से बहराइच के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-927 का निर्माण 6,969.04 करोड़ की लागत से बनना है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रमुख आर्थिक और लाजिस्टिक केंद्रों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 101.51 किलोमीटर है।

भारत-नेपाल व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

यह राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ दो जिलों को नहीं जोड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। नेपालगंज सीमा के माध्यम से भारत और नेपाल के बीच एक महत्वपूर्ण ‘ट्रेड कॉरिडोर’ बनेगा। रूपईडीहा भूमि बंदरगाह तक पहुंच सुगम होगी, जिससे सीमा पार व्यापार और निवेश में वृद्धि होगी।

यूपी के प्रमुख फारेस्ट एवं धार्मिक पर्यटन के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण है। अब लखनऊ से बहराइच की दूरी महज डेढ़ घंटे में तय हो सकेगी। कतर्निया घाट, दुधवा और सोहेलवा जैसे प्रमुख फारेस्ट टूरिज्म स्थलों के अलावा बाराबंकी के महादेवा कॉरिडोर, अयोध्या धाम राम मंदिर, देवीपाटन धाम के साथ ही बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती जैसे अहम धार्मिक पर्यटन की राह सुगम होगी।

Related Articles

Latest News