- मुख्यमंत्री ने जनपद लखीमपुर खीरी की पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला विधानसभा क्षेत्रों में 817.44 करोड़ रुपये की लागत से 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
- 6,706 परिवारों को भू-अधिकार पत्र वितरित किए गए, जिनमें 4,356 स्थानीय थारू परिवार और 2,350 पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए परिवार शामिल हैं।
- विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र, आवास की प्रतीकात्मक चाबी और चेक प्रदान किए गए।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल भू-अधिकार वितरण नहीं, बल्कि अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से आत्मसम्मान की ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है।
- पलिया क्षेत्र में दशकों से लंबित पुनर्वास प्रक्रिया अब आगे बढ़ रही है, जो आत्मसम्मान के साथ नए इतिहास की शुरुआत करेगी।
- प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ऐसे कार्य कर रही है, जो पहले कभी नहीं हुए; क्षेत्र अब पुनर्वास से विकास और विकास से समृद्धि की ओर अग्रसर है।
- सरकार का लक्ष्य अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि जनता की खुशहाली सुनिश्चित करना है, जो संवेदनशील शासन से ही संभव है।
- मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि थारू समुदाय के लोगों पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएंगे, ताकि उनके संघर्ष को सम्मान मिल सके।
- लखीमपुर खीरी अब माफिया, गुंडागर्दी, दंगा और कर्फ्यू से मुक्त होकर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है; यहां की उपजाऊ भूमि और किसानों की मेहनत इसे ‘लक्ष्मीपुर’ की पहचान देती है।
- जनपद की नई पहचान दुधवा नेशनल पार्क, पलिया एयरपोर्ट, चंदन चौकी, बाबा गोला-गोकर्णनाथ और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से बन रही है।
- बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि की मूर्तियों वाले स्थानों पर बाउंड्री वॉल और छत्र का निर्माण कराया जाएगा।
- महर्षि वाल्मीकि के योगदान को याद करते हुए उनके सम्मान को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी पर बल दिया गया।
- ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना के तहत स्थानीय व्यंजनों की ब्रांडिंग कर उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा गया।
केसरिया न्यूज़, लखीमपुर खीरी: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि हमारे शास्त्र में वर्णित है—‘प्रजासुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्’, अर्थात सच्चा शासन वही होता है, जहां प्रजा सुखी रहती है और शासन का कल्याण जनता के कल्याण में निहित होता है। उन्होंने कहा कि शासन की खुशी का आधार उसकी व्यक्तिगत अभिलाषाओं की पूर्ति नहीं, बल्कि जनता-जनार्दन की खुशी होनी चाहिए। यह कार्य तभी संभव हुआ, जब शासन-सत्ता में संवेदना रही। संवेदना बिना भेदभाव जनता तक पहुंची और सेवा के माध्यम से इस प्रकार के कार्य साकार हुए। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम था कि वहां लाभार्थियों को भू-अधिकार, विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं का लाभ प्राप्त हुआ।
मुख्यमंत्री जी जनपद लखीमपुर खीरी में पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला विधानसभा क्षेत्रों में 817.44 करोड़ रुपये की लागत से 314 परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के पश्चात अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने 6,706 परिवारों को भू-अधिकार पत्र प्रदान किए, जिनमें 4,356 स्थानीय थारू परिवार और 2,350 पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए परिवार शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र, आवास की प्रतीकात्मक चाबी तथा चेक भी वितरित किए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल अधिकार प्राप्त करने का आयोजन नहीं था, बल्कि अधिकार से आत्मनिर्भरता और आत्मनिर्भरता से आत्मसम्मान की ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक था। लाभार्थियों को अधिकार के साथ आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की गारंटी मिली। अब कोई भी उनके अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता था और न ही उनसे अवैध वसूली कर सकता था।
उन्होंने कहा कि पलिया में दशकों से अधूरी पड़ी यात्रा इस पुनर्वास कार्यक्रम के माध्यम से आगे बढ़ी। यह भू-अधिकार आत्मसम्मान के साथ पूर्णता की ओर बढ़ते हुए इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा था। जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु बनने पर वही विश्वास अधिकार बनकर धरातल पर उतरा, जिसका दृश्य वहां देखने को मिला।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चन्दन चौकी इस क्षेत्र की पहचान और गौरव का केंद्र रहा, जहां वनवासी संस्कृति, स्वाभिमान और तराई की उर्वरता एक साथ विकसित हुई। उन्होंने कहा कि थारू समाज अपने इतिहास को शौर्य और वीरता से जोड़ता रहा और स्वयं को महाराणा प्रताप का वंशज मानता रहा। हल्दीघाटी के युद्ध में उनके पूर्वजों के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अपनी पहचान के लिए संघर्ष करने वाले इन लोगों को उस दिन भू-अधिकार प्रदान किया गया।
उन्होंने कहा कि 12 अप्रैल को महाराणा सांगा की जयंती से एक दिन पूर्व यह अधिकार मिलना डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता था। पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए उन लोगों का भी उल्लेख किया गया, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब कुछ न्योछावर किया था, लेकिन उन्हें लंबे समय तक भूमि का अधिकार नहीं मिल पाया था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 1976 में थारू समाज को भूमि देने की बात कही गई थी, लेकिन उन्हें अधिकार नहीं मिल सका था। इसी प्रकार वर्ष 1955 में आए स्वतंत्रता सेनानियों को भी मालिकाना हक नहीं मिल पाया था। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में संवेदना का अभाव था, जबकि वर्तमान सरकार ने उनके सपनों को साकार करते हुए भू-अधिकार प्रदान किए। थारू समाज के 4,356 परिवारों को 5,338 हेक्टेयर तथा अन्य 2,350 परिवारों को 4,251 हेक्टेयर भूमि का अधिकार दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने ऐसे कार्य किए, जो पहले कभी नहीं हुए। प्रदेश की 25 करोड़ जनता को परिवार मानते हुए हर जनपद में समान विकास किया गया। स्वामित्व योजना के माध्यम से ग्रामीणों को उनके घरों का मालिकाना हक दिया गया।
मुख्यमंत्री जी ने विधायक रोमी साहनी के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी देने की बात कही। उन्होंने क्षेत्र में रोजगार सृजन के लिए बेकरी और अन्य व्यवसाय स्थापित करने का सुझाव दिया, जिससे थारू समुदाय आत्मनिर्भर बन सके।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पुनर्वास से विकास और विकास से समृद्धि की ओर अग्रसर हुआ। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत जरूरतमंदों को आवास उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें सुरक्षा और सम्मान मिला। सरकार ने प्रत्येक बेघर को आवास, प्रत्येक खेत को पानी और प्रत्येक युवा को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया। थारू समुदाय पर दर्ज फर्जी मुकदमे वापस लेने की भी घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री जी ने थारू समुदाय की सांस्कृतिक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी परंपराओं को विपरीत परिस्थितियों में भी संरक्षित रखा। सरकार का उद्देश्य दलित, वंचित, वनवासी और जनजातीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना रहा।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में 300 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय थे, जिन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की गई। साथ ही, अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए राहत और मुआवजे के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि थारू समुदाय अब लाभार्थी से आगे बढ़कर उद्यमी बनने की दिशा में अग्रसर हुआ। थारू हस्तशिल्प को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए गए।
उन्होंने बताया कि गोला-गोकर्णनाथ में भव्य कॉरिडोर, पीएलए प्लांट और प्लास्टिक पार्क की योजनाएं आगे बढ़ाई गईं। श्रीनगर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण हुआ और शारदा नदी की ड्रेजिंग कर बाढ़ से राहत दिलाई गई। पलिया को एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने की दिशा में भी कार्य प्रगति पर रहा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लखीमपुर खीरी, जो कभी माफिया और अराजकता के लिए जाना जाता था, अब विकास और शांति का प्रतीक बन चुका है। इसकी पहचान दुधवा नेशनल पार्क, पलिया एयरपोर्ट, चन्दन चौकी और अन्य प्रमुख स्थलों से स्थापित हुई।
उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास और महर्षि वाल्मीकि की मूर्तियों वाले स्थलों पर बाउंड्री वॉल और छत्र का निर्माण कराया जाएगा। ज्योतिबा फुले की जयंती का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को भी याद किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ योजना के तहत स्थानीय व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा। किसानों को विभिन्न योजनाओं, एमएसपी और बिजली सुविधाओं का लाभ प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में जनजातीय समुदाय के पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन किया गया। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अरुण कुमार सक्सेना तथा विधायक रोमी साहनी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर आबकारी एवं मद्य निषेध राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नितिन अग्रवाल, विधायक शशांक वर्मा, अमन गिरि, मंजू त्यागी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
