Tuesday, January 27, 2026

नेहा सिंह राठौड़ ने किया यूजीसी के नियमों का समर्थन, विरोध करने वालों को दी उदार बनने की सलाह


लखनऊ, 27 जनवरी (आईएएनएस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ पर विवाद बढ़ता जा रहा है। भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौड़ ने इसका समर्थन किया है।

नेहा ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि नियमों का बेसिक आइडिया समाज में समानता बढ़ाना है। अगर कानून का मकसद भेदभाव या अपमान से बचाना है तो इसमें समस्या क्या है? गायिका ने कहा, “मैं खुद सवर्ण हूं, लेकिन मेरे मन में कोई चोर नहीं है। चोरी के खिलाफ कानून बनता है तो चोर ही डरता है।”

गायिका ने आरक्षण और एससी-एसटी एक्ट के विरोध का उदाहरण देते हुए कहा कि जब आरक्षण आया था, तब भी बहुत विरोध हुआ था। आज भी एससी-एसटी एक्ट का विरोध हो रहा है, लेकिन इन कानूनों ने लाखों लोगों को भेदभाव से बचाया है। समाज में बदलाव के समय कुछ लोग खुश होते हैं तो कुछ नाराज।

नेहा ने कहा, “जाति व्यवस्था से ऊपर उठें। उदार बनें और विचारों को खुला रखें। अगर कोई विरोध कर रहा है या तो वे इस्तीफा दे रहे हैं या फिर प्रोटेस्ट कर रहे हैं तो संविधान ने सभी को अधिकार दिए हैं। वे सभी लोग अपना अधिकार इस्तेमाल कर सकते हैं।”

नेहा ने सिलेक्टिव अप्रोच पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “संविधान की समानता की बात करते हैं, लेकिन जब उर्दू में कुछ होता है तो चुप रहते हैं। अतार्किक, गोबर खाने-गोमूत्र पीने जैसी बातें करते हैं, लेकिन राजनीतिक पार्टी को फायदा हो या न हो, यह कानून समाज और देश के लिए फायदेमंद है।”

इसी के साथ ही नेहा ने शंकराचार्य को लेकर चल रहे विवाद पर कहा, “संतों का मान होना चाहिए। मैंने सुना है कि संतों का दिल बड़ा होता है। गलती हो तो माफी मांग लो। कोई भी गलती कर सकता है। सरकार कह रही है कि यह विरोधी पार्टी का एजेंडा है। मुझे नहीं पता यह किसका एजेंडा है। सच तो यह है कि यह एआई वीडियो नहीं था। मुख्य मुद्दे पर बात नहीं हो रही है।”

–आईएएनएस

एनएस/वीसी


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