दक्षिण कोरिया: लगभग आधे कर्मचारियों को नहीं मिल पा रही पैरेंटल लीव, सर्वे में खुलासा


सोल, 19 जुलाई (आईएएनएस)। पिछले साल (2025) दक्षिण कोरिया से एक ऐसी खबर आई जो इस देश के लिए राहत भरी थी। आंकड़ों में पैरेंटल लीव की कहानी थी। देश ने कहा कि बर्थरेट बढ़ने की वजह से 2024 मेंआंकड़ा बढ़ा है। जन्मदर में 2023 के मुकाबले 3.6 प्रतिशत की वृद्धि थी। सरकार ने अपनी पीठ थपथपाते हुए कहा कि ऐसा उसकी पॉलिसी की वजह से संभव हो पाया है। लेकिन 2026 में एक सर्वे सरकारी दावों की हवा निकालता है।

ये बताता है कि दक्षिण कोरिया में कामकाजी लोगों के लिए मातृत्व और पैरेंटल लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश) का लाभ उठाना आसान नहीं है। एक नए सर्वेक्षण में सामने आया है कि देश के करीब आधे कर्मचारी जरूरत पड़ने पर भी स्वतंत्र रूप से पैरेंटल लीव या बच्चों की देखभाल के लिए कम कार्य घंटे की सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते।

योनहाप न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह सर्वे 1 जून से 9 जून के बीच 19 वर्ष या उससे अधिक आयु के 1,000 कार्यालय कर्मचारियों पर किया गया। सर्वेक्षण गैपजिल 119 नामक नागरिक संगठन की ओर से कराया गया, जो कार्यस्थलों पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा शक्ति के दुरुपयोग को रोकने के लिए काम करता है। इसे ग्लोबल रिसर्च एजेंसी ने संचालित किया।

सर्वे के अनुसार, 46.7 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे जरूरत पड़ने पर भी स्वतंत्र रूप से पैरेंटल लीव नहीं ले सकते। यह आंकड़ा बताता है कि कानूनी प्रावधान होने के बावजूद कई कर्मचारियों को कार्यस्थल पर ऐसी सुविधाओं का लाभ लेने में व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) कर्मचारियों की स्थिति स्थायी कर्मचारियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। 62.3 प्रतिशत संविदा कर्मचारियों ने कहा कि वे पैरेंटल लीव लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, जबकि स्थायी कर्मचारियों में यह आंकड़ा 36.3 प्रतिशत रहा।

कंपनी के आकार के आधार पर भी बड़ा अंतर देखने को मिला। पांच से कम कर्मचारियों वाली छोटी कंपनियों में 68 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें पैरेंटल लीव लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहीं 300 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली बड़ी कंपनियों में यह प्रतिशत घटकर 30.5 प्रतिशत रह गया।

सबसे चिंताजनक स्थिति महिला संविदा कर्मचारियों की रही। इस वर्ग की 70.2 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे स्वतंत्र रूप से पैरेंटल लीव का उपयोग नहीं कर पातीं।

सर्वे में यह भी पाया गया कि 41 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों ने कहा कि वे मातृत्व अवकाश (मैटरनिटी लीव) का भी खुलकर उपयोग नहीं कर सकते। इसके विपरीत, पुरुष कर्मचारी और वरिष्ठ प्रबंधकीय पदों पर कार्यरत लोग (जो आमतौर पर इन सुविधाओं का कम उपयोग करते हैं) ने अपेक्षाकृत अधिक संख्या में कहा कि वे मातृत्व और पैरेंटल लीव दोनों का स्वतंत्र रूप से लाभ उठा सकते हैं।

गैपजिल 119 का कहना है कि कार्यस्थल पर ये नीतियां काफी हद तक कंपनी के आकार, रोजगार की प्रकृति, वेतन स्तर और अन्य कार्य परिस्थितियों पर निर्भर करती है। संगठन ने जोर देकर कहा, “ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है, जहां कर्मचारी बिना किसी दबाव या भेदभाव के मातृत्व और पैरेंटल लीव का उपयोग कर सकें।”

योनहाप ने विशेषज्ञों के हवाले से कहा कि अगर कर्मचारियों को परिवार और काम के बीच संतुलन बनाने के लिए पर्याप्त सहयोग नहीं मिलेगा, तो इसका असर न केवल कर्मचारियों के स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर पड़ेगा, बल्कि देश की कार्य उत्पादकता और जन्म दर जैसी सामाजिक चुनौतियों पर भी लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है।

–आईएएनएस

केआर/


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