नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। देवी की आराधना को समर्पित नवरात्रि का पर्व चल रहा है। कई लोग पहले दिन, यानी प्रतिपदा और अष्टमी या चढ़ती-उतरती का व्रत रखते हैं, तो काफी लोग पूरे 9 दिन व्रत रखकर माता की आराधना करते हैं। व्रत में खान-पान बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में आयुर्वेद बताता है कि मखाना व्रत के लिए सर्वोत्तम आहार है, जो ऊर्जा देता है और कमजोरी नहीं होने देता।
ऐसे में मखाना को व्रत का सबसे अच्छा और सात्विक आहार माना जाता है। यह हल्का, आसानी से पचने वाला और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। मखाना सात्विक आहार का प्रतीक है। व्रत के दौरान यह शरीर को हल्का रखता है, मन को शांति देता है और ऊर्जा बनाए रखता है। यह अनुशासित जीवनशैली और शुद्ध भोजन के लिए गिना जाता है।
उत्तर प्रदेश कल्चरल डिपार्टमेंट के अनुसार, व्रत का असली सार है, आस्था के साथ अनुशासन और स्वास्थ्य का संतुलन। ऐसे में व्रत के दौरान मखाने का सेवन लाभदायी होता है।
मखाना पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें कैलोरी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फास्फोरस और आयरन भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें वसा बहुत कम होती है।
मखाना के सेवन से एनर्जी मिलती है और कमजोरी दूर होती है। व्रत में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट से लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है। थकान, कमजोरी और भूख नहीं लगती। पेट जल्दी भर जाता है। यह पाचन के लिए अच्छा है। इसमें हाई फाइबर पाया जाता है, जिससे पाचन सुधरता है, कब्ज नहीं होता और पेट साफ रहता है। मखाने में कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने से डायबिटीज में फायदेमंद है और व्रत में शुगर लेवल स्थिर रहता है।
मखाना दिल और हड्डियों के लिए भी फायदेमंद होता है। इसमें पोटैशियम और मैग्नीशियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखता है। कैल्शियम से हड्डियां मजबूत होती हैं। एंटीऑक्सीडेंट से इम्युनिटी बढ़ती है, सूजन कम होती है और त्वचा स्वस्थ रहती है। वजन नियंत्रण में भी मखाना कारगर है। कम कैलोरी और हाई फाइबर से वजन बढ़ने नहीं देता, व्रत में भी फिटनेस बनी रहती है।
मखाना व्रत को संतुलित, पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक बनाता है। मखाने को घी में भूनकर, दूध में डालकर खीर बनाकर या सादा स्नैक के रूप में खाया जा सकता है।
–आईएएनएस
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