नारी शक्ति वंदन अधिनियम नारी सम्मान का नया अध्याय: डिप्‍टी सीएम सुनेत्रा पवार


मुंबई, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार ने बुधवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ‘ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम’ बताया।

उन्होंने कहा कि यह कानून पूरे देश में महिलाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखता है।

सुनेत्रा पवार ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार को हार्दिक बधाई दी और इस बात को दोहराया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पूर्ण समर्थन में खड़ी है।

उन्होंने पूरा विश्वास जताया कि यह ऐतिहासिक विधेयक 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में ‘जीवन शक्ति’ का काम करेगा। सुनेत्रा पवार ने इस नए कानून और भारतीय इतिहास में महिला नेतृत्व की समृद्ध परंपरा के बीच समानताएं बताईं।

उन्होंने कई महान हस्तियों को श्रद्धांजलि दी, जिनमें राजमाता जीजाऊ (जिन्होंने स्वराज का मंत्र दिया); महारानी ताराबाई (जिन्होंने राज्य की बहादुरी से रक्षा की); अहिल्यादेवी होल्कर (जिन्होंने न्याय और कल्याण का एक आदर्श स्थापित किया); सावित्रीबाई फुले (जिन्होंने महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत की); रानी लक्ष्मीबाई (जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी बहादुरी दिखाई); और इंदिरा गांधी (जिन्होंने आधुनिक युग में महिला नेतृत्व का बेहतरीन उदाहरण पेश किया) शामिल हैं।

सुनेत्रा पवार ने कहा, “यह विधेयक केवल राजनीतिक आरक्षण के बारे में नहीं है। यह ‘स्त्री-शक्ति’ (नारी शक्ति) की उस गौरवशाली परंपरा की साकार रूप है, जो भारतीय संस्कृति में हजारों वर्षों से मौजूद है।”

उन्होंने कहा कि यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करता है। इस कदम से ग्रामीण और शहरी, हर तबके की महिलाओं को मुख्यधारा की फैसला लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकेगा।

सुनेत्रा पवार ने कहा कि यह कानून ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसी मौजूदा सरकारी पहलों और महिलाओं के समग्र सशक्तिकरण को एक नई गति देगा।

इससे पहले, उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने 16 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र के दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में प्रस्तावित संशोधनों का समर्थन करते हुए कहा था कि यह ऐतिहासिक कदम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रभावी कार्यान्वयन का मार्ग प्रशस्त करेगा, और भारतीय लोकतंत्र की यात्रा में एक स्वर्णिम अध्याय साबित होगा।

प्रधानमंत्री मोदी को लिखे एक पत्र में, उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि यह पहल केवल एक विधायी सुधार नहीं है, बल्कि शासन और राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है।

–आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी


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