मुंबई, 16 फरवरी (आईएएनएस)। मुंबई की चमक-दमक और फिल्म इंडस्ट्री की दुनिया ने हमेशा लोगों को अपनी ओर खींचा है। ऐसे ही तमाम कलाकारों में से एक हैं रवि टंडन, जिन्हें इस शहर ने नाम, शोहरत, पैसा सब दिया, लेकिन फिर भी वह आगरा की सरजमीं से जुड़े रहे।
रवि टंडन का जन्म 17 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था। उनके पिता अमरनाथ टंडन जिला जज थे। शुरूआती पढ़ाई के बाद उन्होंने आगरा कॉलेज से बीएससी की डिग्री हासिल की। उनके माता-पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें, लेकिन वह हमेशा से फिल्म इंडस्ट्री में जाने का सपना देखते थे। प्री-मेडिकल टेस्ट में जब वह फेल हुए, तो उन्होंने पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और 1958 में मुंबई का रुख किया।
शुरुआत में उन्हें छोटे-मोटे रोल मिले और फीस भी बहुत कम थी। उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के रूप में अभिनय शुरू किया, जहां उन्हें सिर्फ दो रुपए मिलते थे। फिल्म ‘लव इन शिमला’ (1960) में उन्होंने सहायक और जूनियर कलाकार के रूप में काम किया। इस दौरान उन्होंने फिल्म बनाने की बारीकियां समझीं।
रवि टंडन की मेहनत और ईमानदारी को मनोज कुमार ने पहचाना। फिल्म ‘बलिदान’ (1971) के सेट पर उन्हें निर्देशक के रूप में मौका मिला। इसके बाद उनका करियर लगातार ऊपर की ओर बढ़ता गया। उन्होंने कई हिट फिल्में दीं, जिनमें ‘अनहोनी’, ‘मजबूर’, ‘खेल खेल में’, ‘जवाब’, ‘जिंदगी’, ‘चोर हो तो ऐसा’, ‘खुद्दार’, ‘आन और शान’, और ‘नजराना’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा में एक नामी निर्देशक के रूप में स्थापित कर दिया।
रवि टंडन की खासियत यह थी कि वह किसी एक शैली तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने थ्रिलर, म्यूजिकल, रोमांस और ड्रामा सभी में काम किया। ‘अनहोनी’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों के दिलों में डर और रोमांच की एक नई दुनिया बनाई। वहीं, ‘खेल खेल में’ ने कॉलेज के रोमांस, आर.डी. बर्मन के संगीत और ऋषि कपूर-नीतू सिंह की जोड़ी को अमर बना दिया।
रवि टंडन को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले। साल 2015 में आगरा में उन्हें प्राइड ऑफ आगरा अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2020 में उन्हें ब्रज रत्न अवॉर्ड भी मिला। अपने शहर आगरा में सम्मानित होने पर वे बहुत भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि मुंबई ने उन्हें पहचान दी, लेकिन उनके सपने हमेशा आगरा की सरजमीं से जुड़े रहे। यहीं से उन्होंने इस मुकाम पर आने का सपना देखा था।
रवि टंडन का निधन 11 फरवरी 2022 को मुंबई में हुआ। वह 86 वर्ष के थे। उनके जाने से हिंदी सिनेमा और उनके चाहने वालों के बीच एक खालीपन रह गया।
–आईएएनएस
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