डायलॉग के बिना एक्टिंग सबसे मुश्किल, खामोशी शब्दों से ज्यादा बोलती है : मिहिर आहूजा


मुंबई, 25 फरवरी (आईएएनएस)। अभिनेता मिहिर आहूजा अपनी हालिया रिलीज वेब सीरीज ‘शब्द- रीत और रिवाज’ को लेकर उत्साहित हैं, जिसमें वह घुप्पी सिंह के किरदार में हैं। अभिनेता का मानना है कि बिना किसी डायलॉग के एक्टिंग करना परफॉर्मेंस का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा होता है।

आईएएनएस से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि खामोशी अक्सर शब्दों से ज्यादा गहरी और प्रभावशाली होती है।

मिहिर ने कहा, “एक्टिंग में चुप्पी बहुत कुछ कह जाती है। हम ज्यादातर समय डायलॉग याद करने और उनकी डिलीवरी पर फोकस करते हैं, लेकिन असली जादू तब होता है, जब टेक्स्ट बिल्कुल न हो। स्क्रिप्ट में जो लिखा होता है, उसके पीछे एक सबटेक्स्ट होता है, यानी भावनाएं, विचार और इरादे, जो शब्दों में नहीं दिखते। जब कोई सीन पूरी तरह बिना बोले होता है, तो सबटेक्स्ट को दिखाना सबसे ताकतवर तरीका बन जाता है। उसमें जो खूबसूरती है, वो शब्दों से कहीं ज्यादा गहरी होती है।”

मिहिर आहूजा का किरदार घुप्पी सिंह एक 16 साल का लड़का है, जो सालों से हकलाने की समस्या से जूझ रहा है। उसके पिता हरमिंदर सिंह एक प्रसिद्ध भजन गायक हैं और चाहते हैं कि घुप्पी भक्ति संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाए। लेकिन, घुप्पी का दिल फुटबॉल में लगता है। सीरीज पीढ़ियों के बीच के टकराव, परिवार की उम्मीदों और सपनों के बीच के संघर्ष को संवेदनशीलता से दिखाती है।

मिहिर और उनके को-एक्टर सुविंदर विक्की ने बताया कि शो में भावनाओं की गहराई और लेयर्ड स्टोरीटेलिंग पर बहुत जोर है। सेट पर पूरी टीम का माहौल बेहद सकारात्मक और सहयोगी रहा। दोनों ने कहा कि कहानी की थीम रिश्ते, विश्वास, सपने और दबाव के साथ चलती है और इस सीरीज को हर भाषा और कल्चर के दर्शकों से जोड़ती है।

मिहिर आहूजा कई प्रोजेक्ट्स में अपनी छाप छोड़ चुके हैं। वह सुपर 30, द आर्चीज, मिशन ओवर मार्स समेत कई फिल्मों-सीरीज में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुके हैं।

–आईएएनएस

एमटी/एबीएम


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