Monday, February 16, 2026

वंदे मातरम पर विवाद के बजाय एकता और भाईचारे पर ध्यान देना चाहिए: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी


बरेली, 9 दिसंबर (आईएएनएस)। ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने पर लोकसभा में सोमवार को विशेष चर्चा हुई। इसी मुद्दे पर मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के चीफ मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने आईएएनएस से बातचीत की और अपनी राय साझा की।

उन्होंने अपील की कि वंदे मातरम पर विवाद के बजाय देश की एकता, भाईचारे और आपसी सम्मान पर ध्यान देना चाहिए।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि इन दिनों लोकसभा में वंदे मातरम को लेकर जो हंगामा हो रहा है, वह बेवजह है। इस गीत को आए हुए 150 साल हो चुके हैं और आज इसकी 150वीं सालगिरह पर भी नेता अपनी-अपनी राजनीति में उलझे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनके नजरिए से वंदे मातरम सिर्फ एक गीत है और जिसे यह पसंद है वह इसे पूरी आजादी के साथ पढ़ सकता है। किसी को रोकने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग किसी वजह से वंदे मातरम नहीं पढ़ना चाहते, उन पर किसी तरह का दबाव डालना गलत है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी मान्यता, अपनी सुविधा और अपने विवेक के मुताबिक फैसला लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को यह कहना कि तुम्हें हर हाल में यह गीत करना ही है, यह बात ठीक नहीं है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला भी दिया जिसमें मद्रास हाईकोर्ट के निर्णय के बाद साफ कहा गया था कि किसी भी छात्र या नागरिक पर वंदे मातरम पढ़ने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। अदालतें हमेशा व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करती हैं और यही बात आज भी लागू होती है।

उनका कहना है कि लोगों को उनके विवेक पर छोड़ देना ही बेहतर है। जो लोग इस गीत को पसंद करते हैं, वे शौक से पढ़ें। यह बिल्कुल स्वागतयोग्य है, लेकिन जो नहीं पढ़ना चाहते, उनको मजबूर करना न संविधान के हिसाब से सही है, न समाज के।

–आईएएनएस

पीआईएम/वीसी


Related Articles

Latest News