Saturday, February 14, 2026

मध्य प्रदेश: हाईकोर्ट ने बाघों की मृत्यु में अचानक हुई वृद्धि पर मांगी रिपोर्ट


जबलपुर, 11 फरवरी (आईएएनएस)। हाल के महीनों में बाघों की मौतों के मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को 25 फरवरी तक इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह आदेश भोपाल निवासी वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में उन्होंने वर्ष 2025 में देश में सबसे अधिक 54 बाघों की मौत और इस साल जनवरी से अब तक मध्य प्रदेश में नौ बाघों की मौत पर चिंता जताई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने राज्य में बाघों की मौत से जुड़े विस्तृत आंकड़े अदालत के सामने रखे। उन्होंने आईएएनएस को बताया कि अदालत ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) के फील्ड डायरेक्टर को भी 25 फरवरी तक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया है।

संघी ने कहा, “राज्य सरकार और एनटीसीए को जवाब दाखिल करना था, लेकिन उन्होंने और समय मांगा। सुनवाई के दौरान मैंने अदालत को बताया कि केवल 2026 के पहले महीने में ही नौ बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए हैं, जिनमें से अधिकांश बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में थे।”

उन्होंने आगे कहा, “स्थिति की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली पीठ ने बीटीआर के फील्ड डायरेक्टर को इतनी बड़ी संख्या में बाघों की मौत पर व्यापक स्पष्टीकरण के साथ रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।”

बहस के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बड़े पैमाने पर अवैध शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग अक्सर इन मौतों को ‘क्षेत्रीय संघर्ष’ बताकर टाल देता है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे कहीं अधिक गंभीर है।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बाघों की संख्या में गिरावट के पीछे संगठित शिकार और करंट लगने की घटनाएं मुख्य कारण हैं और अधिकारी इस संकट पर प्रभावी कदम उठाने के बजाय लापरवाही बरत रहे हैं।

अदालत ने बुधवार को दलीलें सुनने के बाद संबंधित अधिकारियों को 25 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी


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