मोहर्रम का चांद नजर आते ही पुराना शहर गम में डूब गया। इमामबाड़ों और घरों में काले झंडे लगा दिए गये। मजलिसों की सदायें बलन्द होने लगीं। पहली मोहर्रम को शाम 6 बजे एतिहासिक आसिफी इमामबाड़े से शाही जरीह का जुलूस निकाला जाएगा। हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से निकाले जाने वाले इस जुलूस में शाही जरीह के साथ ताजिया, हजरत अब्बास का अलम, हजरत अली असगर का झूला, काले झंडे लिए हुए बच्चे, शहनाई पर गूंजती मातम की धुनें और पीएसी बैंड पर मातम की धुन सुनने को मिलेगी। यह जुलूस बड़े इमामबाड़े से निकलकर रूमी गेट, नीबू पार्क, घंटाघर होता हुए देर रात में छोटे इमामबाड़े पहुंचकर खत्म होगा। जुलूस के रास्ते में सबीलें लगाने का काम मोहर्रम का चांद नजर आने के साथ ही शुरू हो गया है।
मोहर्रम का चांद दिखा, पुराना शहर गम में डूबा
शिया और सुन्नी चांद कमेटियों ने मंगलवार को मोहर्रम का चांद नजर आने की पुष्टि कर दी है। पहली मोहर्रम 17 जून को होगा। हजरत इमाम हुसैन का शहादत दिवस यौमे आशूरा 26 जून को मनाया जाएगा। मोहर्रम का चांद नजर आते ही पुराना शहर गम में डूब गया है। घरों और इमामबाड़ों पर काले झंडे लगाए जाने लगे हैं। मरकजी शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैय्यद सैफ अब्बास नकवी ने बताया कि 16 जून को मोहर्रम का चांद हो गया है, 17 को पहली मोहर्रम है और 26 जून को शहादते हजरत इमाम हुसैन (यौमे आशूरा) मनाया जाएगा। मरकजी चांद कमेटी फिरंगी महल के अध्यक्ष और काजी-ए-शहर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी मोहर्रम का चांद नजर आने की पुष्टि की है।
