नई दिल्ली, 14 मार्च (आईएएनएस)। राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज कुमार झा ने भारत-ईरान के बीच हाल में हुई कूटनीतिक बातचीत और मेरठ में सड़क पर नमाज को लेकर दिए गए पुलिस प्रशासन के बयान पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने आईएएनएस से कहा कि इन मुद्दों को बहुत सरल तरीके से नहीं देखा जाना चाहिए और कूटनीति में समय पर संवाद बेहद महत्वपूर्ण होता है। यह मामला भारत की कूटनीतिक परंपरा और नैतिक विरासत से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि संसद सत्र के दौरान इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठाया गया था, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कई अखबारों में लिखा था।
उन्होंने कहा, “यह भारत की सभ्यतागत विरासत का हिस्सा है, एक नैतिक धरोहर, जिसे हमारी कूटनीति को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
मनोज झा ने यह भी कहा कि देर आए दुरुस्त आए। पिछले दो दिनों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने समकक्षों से पांच बार बातचीत की है। पीएम मोदी ने भी ईरान के राष्ट्रपति से बात की।
उन्होंने कहा, “कभी-कभी कूटनीतिक में देरी होने से कई तरह की जटिलताएं पैदा हो जाती हैं। लेकिन, अब चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही हालात सामान्य होंगे, क्योंकि संकट साफ दिखाई दे रहा है।”
वहीं, मेरठ के एसएसपी अविनाश पांडे द्वारा सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर चेतावनी और एफआईआर के आदेश पर भी मनोज झा ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सिर्फ अधिकारियों को दोष नहीं देना चाहिए, बल्कि मौजूदा राजनीतिक माहौल भी इसके पीछे एक बड़ा कारण है।
मनोज झा ने कहा, “एसएसपी को दोष मत दीजिए। जब राजनीति का लक्ष्य नफरत फैलाना बन जाता है, तब ऐसी बातें सामने आती हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि आमतौर पर लोग इस तरह सड़क पर नमाज नहीं पढ़ते। ईद की नमाज आम तौर पर तय समय और तय जगह पर होती है।
उन्होंने कहा, “अगर कोई वरिष्ठ अधिकारी इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करता है तो साफ है कि इससे राजनीतिक लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही है।”
मनोज झा ने आगे कहा कि हाल ही में उन्होंने संभल में एक पुलिस अधिकारी का बयान भी सुना था और उन्हें लगता है कि देश के माहौल में जो जहर घुल गया है, वह अब लोगों की भाषा में भी दिखाई देने लगा है।
–आईएएनएस
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