'खुलकर हंसने की प्रतियोगिता होती, तो आप और मां हर बार जीतते', पिता को याद कर भावुक हुई स्वास्तिका मुखर्जी


मुंबई, 11 मार्च (आईएएनएस)। बंगाली एक्ट्रेस स्वास्तिका मुखर्जी ने फिल्मों और टेलीविजन शो के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। वह सबसे ज़्यादा पसंद की जाने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं। वह अपने निजी जीवन को लेकर चर्चाओं में बनी रहती है। इस कड़ी में उनका एक पोस्ट फैंस के बीच काफी पसंद किया जा रहा है, जो उन्होंने अपने पिता के लिए लिखा है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा किया और बंगाली भाषा में दिल छू लेने वाला नोट लिखा।

स्वास्तिका मुखर्जी ने लिखा, ”हर पल दुनिया में कितनी सारी घटनाएं होती रहती हैं, कितने रंग दिखाती है यह दुनिया। अगर आप होते तो हर रात हम इन सब बातों पर लंबी चर्चा करते, मुझे पूरा यकीन है। आप पहले हंसते और फिर हर बुरी चीज को भगा देते। आपकी वह जोरदार हंसी मुझे हर दिन याद आती है, बाबा। अगर खुलकर दिल से हंसने की कोई प्रतियोगिता होती, तो आप और मां हर बार पहला इनाम जीतते। अफसोस, आजकल कोई उस तरह से खुलकर नहीं हंसता। अगर कोई ज़ोर से हंस दे तो लोग क्या कहेंगे—यह चिंता अब सबसे बड़ी चिंता बन गई है।”

स्वास्तिका ने कहा, ”जब भी मैं कोई नया काम शुरू करती हूं, तो लगता है, काश आप यह जान पाते। जब कोई नया काम सामने आता है, तो मन में आता है कि काश आप इसे देख पाते। इन ‘काश’ के इतने बड़े पहाड़ बन गए हैं कि एक दिन यह कंचनजंघा पर्वत से भी बड़ा हो जाएगा। यह दिन आते ही सुबह से ही मन घड़ी की तरफ देखता रहता है। लगता है जैसे आप अभी भी यहीं हैं, जैसे अभी भी बाहर वाले कमरे के खाट पर आपको देख पा रही हूं, जैसे अभी भी आपके शरीर को छूने पर महसूस होता है कि आप यहीं मौजूद हैं।”

उन्होंने आगे कहा, ”आपका यूं होना ही मेरा सहारा है। चाहे जैसे भी हों, लेकिन आपका होना ही बहुत है, जैसे बरगद के पेड़ की छाया, जिसमें आराम, शांति और भरोसा मिलता है। मेरे लिए जिंदगी में सबसे जरूरी चीज आप हो। आपका बड़ा स्टील का गिलास अब मेरा गिलास बन गया है। जो पहले दादा का गिलास कहलाता था, अब उसका नाम बदलकर ‘बड़ी दीदी का गिलास’ हो गया है। जब भी मैं उसे हाथ में लेकर पानी पीती हूं, आपकी हथेलियां मेरी आंखों के सामने तैरने लगती हैं। किसी पुरुष के इतने सुंदर हाथ-पैर मैंने आज तक नहीं देखे। बिल्कुल भगवान जैसे।”

स्वास्तिका ने पोस्ट में लिखा, ”हमारी जो बात हुई थी, उसे याद रखना। अगली बार आपको ही आना है। कहीं भूलकर किसी और जगह मत चले जाना। देखते-देखते 6 साल गुजर गए, बाबा। इसी तरह बाकी समय भी गुजर जाएगा, और फिर एक दिन आपसे मुलाकात बादलों के उस देश में होगी। मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, बाबा। रोज घर लौटकर मुझे एक बार यह बात आपको कहनी चाहिए थी, लेकिन नहीं कह पाई। जब आपसे मिलूंगी तो आपको कसकर गले लगाकर यह बात जरूर कहूंगी।”

आखिर में उन्होंने लिखा, ”मैं शूटिंग के लिए पहाड़ों पर आई हूं। आज सुबह से चारों तरफ बादल छाए हुए हैं। लगता है जैसे इन्हीं बादलों में आप मौजूद हैं, और बालकनी से होते हुए कमरे में आ रहे हैं। क्या आप बता रहे हैं कि आप यहीं हैं, बाबा? क्या आप आसमान से उतरकर मुझे इस तरह गले लगा रहे हैं? आज आसमान भी जैसे बिल्कुल शांत और उदास है, जैसे उसका भी मन भारी हो। उसने अपना आंचल फैलाकर किसका रास्ता रोक रखा है, कौन जाने।”

–आईएएनएस

पीके/डीएससी


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