Sunday, February 22, 2026

कराची को सिंध से अलग करने की मांग, बवाल के बाद संसद में प्रस्ताव पास


कराची, 21 फरवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तानी प्रांत सिंध की राजधानी कराची को लेकर जनता सड़क पर है; वो अपने शहर की बदहाली को दूर करने की मांग हुक्मरानों से कर रही है। 14 फरवरी को ‘जीने दो कराची को’ की गुहार के साथ लोग सड़कों पर उतरे, उन्हें पुलिस ने खदेड़ा, आंसू गैस के गोले दागे। कराची को लेकर सियासत खूब हो रही है।

इस सब उथल-पुथल के बीच सिंध असेंबली के सदस्यों ने शनिवार को एक प्रस्ताव पारित किया। उन आशंकाओं पर विराम लगाने की कोशिश की गई जिसमें कराची को सिंध से अलग करने की बात है। सदन के सदस्यों ने इस शहर को प्रांत का “अविभाज्य हिस्सा” घोषित किया और इसके उलट किसी भी कदम का विरोध किया गया।

सीएम मुराद अली शाह द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया कि सदन “सिंध के बंटवारे या कराची को मिलाकर एक अलग प्रांत बनाने की किसी भी साजिश को खारिज करता है।” शाह, आसिफ अली जरदारी की पीपीपी यानी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से हैं।

इस प्रस्ताव में कहा गया, “कराची सिंध का एक अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और हमेशा रहेगा।”

मुख्यमंत्री का यह कदम मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) द्वारा कराची में केंद्र के दखल की बार-बार मांग करने के बाद आया है, जिसमें मांग की गई है कि इस शहर को “फेडरल टेरिटरी” बनाया जाए।

प्रस्ताव में “सभी सियासी दलों से अपील की गई कि वो विभाजित करने की बातों या ऐसे कामों से बचें जिनसे सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को खतरा हो।”

इसमें इस बात की पुष्टि की गई कि “सिंध की एकता, क्षेत्रीय अखंडता और ऐतिहासिक पहचान हमारे पुरखों से मिली पवित्र अमानत हैं और इनकी रक्षा संवैधानिक, लोकतांत्रिक और राजनीतिक तरीकों से की जाएगी।”

प्रस्ताव में कहा गया कि सिंध असेंबली “सिंध की अखंडता, सम्मान और अटूट विरासत की रक्षा के लिए—पार्टी लाइन से ऊपर—एकजुट है।”

इस हफ्ते की शुरुआत में, एमक्यूएम-पी के मुस्तफा कमाल—जो संघीय स्वास्थ्य मंत्री (केंद्र में) भी हैं—ने कराची के लोगों की सिस्टेमिक अनदेखी के लिए प्रांतीय प्रशासन की आलोचना की थी।

प्रस्ताव के बारे में विपक्ष की बहस का जवाब देते हुए, सीएम मुराद ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि प्रस्ताव गैर-संवैधानिक है, और विरोधियों को चुनौती दी कि वे कानून का उल्लंघन करने वाला एक भी पॉइंट बताएं।

उन्होंने एमक्यूएम-पी के “बदलते” रुख की ओर इशारा किया, यह याद दिलाते हुए कि हाउस ने 2019 में सिंध के बंटवारे के खिलाफ एक जैसा ही एकमत प्रस्ताव पास किया था, और उस समय, एमक्यूएम-पी इसके सपोर्ट में खड़ी थी।

अजब बात ये है कि जो पार्टी नेशनल लेवल पर पीपीपी के साथ है वही प्रांतीय स्तर पर सीधी चुनौती पेश कर रही है।

–आईएएनएस

केआर/


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