बेंगलुरू, 3 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मैंगलोर सब-जोनल कार्यालय ने सोमवार को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत मैंगलोर स्थित विशेष अदालत में भीमाशंकर बिलगुंडी और मल्लन्ना एस. मद्दारकी के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह मामला कलबुर्गी के महादेवप्पा रामपुरे मेडिकल कॉलेज (एमआरएमसी) में वर्ष 2018 से 2024 के बीच हुए कथित स्टाइपेंड घोटाले से जुड़ा है।
ईडी ने यह जांच कलबुर्गी सिटी सीईएन क्राइम पुलिस स्टेशन, कर्नाटक द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इस एफआईआर में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत डॉ. एस.एम. पाटिल, सुभाष, केनरा बैंक के एक प्रबंधक और अन्य लोगों को नामजद किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मेडिकल कॉलेज के स्नातकोत्तर छात्रों को मिलने वाले वजीफे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं।
ईडी की जांच के अनुसार, मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी ने लेखा विभाग के कुछ कर्मचारियों और एचकेई सोसायटी के कार्यालय अधीक्षक मल्लन्ना एस. मद्दारकी की मदद से यह घोटाला अंजाम दिया। भीमाशंकर हैदराबाद कर्नाटक एजुकेशन सोसायटी के तत्कालीन अध्यक्ष थे और यही संस्था एमआरएमसी का संचालन करती है।
आरोप है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच पीजी मेडिकल छात्रों के बैंक खातों में जमा लगभग 33.34 करोड़ रुपए की स्टाइपेंड राशि हड़प ली गई। बताया गया है कि छात्रों से प्रवेश के समय खाली चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए जाते थे और बाद में उन्हीं चेकों में राशि भरकर रकम निकाल ली जाती थी, जिससे छात्र अपने अधिकार के वजीफे से वंचित रह गए।
मामले की जांच के दौरान ईडी ने अप्रैल और मई 2025 में कर्नाटक के कलबुर्गी में नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए। जांच के आधार पर ईडी ने करीब 6.72 करोड़ रुपए की अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
यह संपत्ति मुख्य आरोपी भीमाशंकर बिलगुंडी द्वारा अपने बेटों राजकुमार बिलगुंडी और संतोष बिलगुंडी के नाम पर खरीदी गई। इसके अलावा बिलगुंडी के कई बैंक खातों और सह-आरोपी मल्लन्ना एस. मद्दारकी की अचल संपत्तियों को भी 18 जुलाई 2025 और 4 सितंबर 2025 को जारी अस्थायी कुर्की आदेशों के जरिए अटैच किया गया।
एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और खुलासे हो सकते हैं।
–आईएएनएस
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