जगदंबिका पाल ने नक्सलवाद पर लगाम लगाने के लिए एनडीए सरकार की तारीफ की


नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर नक्सलवाद के मुद्दे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने वामपंथी उग्रवाद को कई राज्यों में फैलने दिया, जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उठाए गए कड़े कदमों ने इसके फैलाव को काफी हद तक कम कर दिया है।

जगदंबिका पाल ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी के सार्वजनिक बयान और सोशल मीडिया पोस्ट उनकी गंभीरता की कमी को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी पोस्ट तो कर रहे हैं, लेकिन संसद में हाजिर नहीं हो रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यह बात उठाई थी कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान, माओवादी विचारधारा से जुड़े लोग कांग्रेस नेता के साथ देखे गए थे।

भाजपा सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कुछ सालों में, शैक्षणिक संस्थानों में भी माओवादी तत्वों के समर्थन को दर्शाने वाली घटनाएं सामने आई थीं।

पिछली विवादों का जिक्र करते हुए पाल ने दावा किया कि जब सीआरपीएफ के 76 जवान मारे गए थे, तो कुछ जगहों पर जश्न मनाया गया था, जो उनके अनुसार, एक परेशान करने वाली मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद, जिसे उन्होंने हिंसा और सशस्त्र संघर्ष पर आधारित एक आंदोलन बताया, ने पिछले कुछ सालों में 20,000 से ज्यादा बेगुनाह लोगों की जान ले ली है।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान, तथाकथित ‘रेड कॉरिडोर’ करीब 10 से अधिक राज्यों में फैल गया था, जिससे आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी।

उन्होंने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद पर भी निशाना साधा, जो यूपीए के दौर में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में काम करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परिषद ने माओवाद-विरोधी अभियानों में दखल दिया था।

पाल के अनुसार, परिषद के कुछ सदस्य माओवादी उद्देश्यों के प्रति सहानुभूति रखते थे, जिससे, उनके दावे के मुताबिक, ‘रेड टेरर’ (लाल आतंक) के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने में रुकावट पैदा हुई।

गृह मंत्री शाह की टिप्पणियों का हवाला देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि एनडीए सरकार के कड़े रुख के कारण माओवादी प्रभाव में काफी कमी आई है।

उन्होंने आगे कहा कि जिन इलाकों में कभी वामपंथी उग्रवाद का असर था, वहां अब विकास के काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा, “आज, उन्हीं राज्यों में, गांवों में स्कूल बनाए जा रहे हैं, अस्पताल खोले जा रहे हैं, कौशल विकास केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, और मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन इलाकों में अब डर और अस्थिरता की जगह सुशासन और विकास ने ले ली है।

उन्होंने आगे कहा कि अगर पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार सत्ता में न आई होती, तो नक्सलवाद पूरे देश में और भी ज्यादा फैल सकता था। पाल ने आखिर में कांग्रेस, यूपीए सरकार और राहुल गांधी को माओवादी प्रभाव के पहले हुए विस्तार के लिए जिम्मेदार ठहराया।

–आईएएनएस

एससीएच


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