भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन में 100 अरब डॉलर के अवसर खुल सकते हैं: रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 22 मई (केसरिया न्यूज़)। भारत के इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन से 2030 तक 100 अरब डॉलर के कार्बन उत्सर्जन कमी के अवसर खुल सकते हैं। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में दी गई।

टीडीके वेंचर्स और थेइया वेंचर्स की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में अभी भी पूंजी की भारी कमी है – वर्तमान फंडिंग अधिक विकसित अर्थव्यवस्थाओं में देखे गए स्तरों के आधे (40 प्रतिशत) से भी कम है।

रिपोर्ट में इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन को न केवल जलवायु लक्ष्य के रूप में, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा कवच के रूप में भी बताया गया।

वर्तमान में, भारत को प्रतिवर्ष 140 अरब डॉलर के ऊर्जा आयात बिल का सामना करना पड़ता है, जिससे देश भू-राजनीतिक झटकों जैसे मध्य पूर्व संकट के प्रति संवेदनशील हो जाता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्रियल एनर्जी ट्रांजिशन एक ऐसी “मजबूत अर्थव्यवस्था” के निर्माण का मार्ग है जो देश को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों से बचाएगी। यह रिपोर्ट में तकनीक और निवेश के लिहाज से सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया गया, जिसमें दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण, औद्योगिक आईओटी और डिजिटल ट्विन्स, और ऊर्जा दक्षता शामिल हैं।

टीडीके वेंचर्स के निवेश निदेशक रवि जैन ने कहा, “भारत की कार्बन उत्सर्जन कम करने की यात्रा केवल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि उद्योग में ऊर्जा का उपयोग कितनी कुशलता से किया जाता है। हम ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने, बड़े पैमाने पर औद्योगिक बुद्धिमत्ता को लागू करने और दक्षता प्रौद्योगिकियों को आगे बढ़ाने में एक पीढ़ीगत निवेश अवसर देखते हैं।”

जैन ने आगे कहा, “यह अवसर विशाल है, इसमें पूंजी की कमी है और यह तेजी से विकसित हो रहा है। हम इसका नेतृत्व करने वाले उद्यमियों के दीर्घकालिक भागीदार बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

थेया वेंचर्स की संस्थापक और जनरल पार्टनर प्रिया शाह ने कहा, “यह रिपोर्ट अनावश्यक बातों को दरकिनार करते हुए उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं को यह व्यावहारिक और ठोस दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए बनाई गई है कि सबसे अधिक प्रभाव डालने वाले अवसर कहां हैं और उन्हें बड़े पैमाने पर साकार करने के लिए क्या आवश्यक होगा।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि उद्यमियों और पूंजी आवंटनकर्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल नियामक अनुपालन की औपचारिकता पूरी करने के बजाय लागत दक्षता ही अगले दशक में इस परिवर्तन को गति प्रदान करेगी, क्योंकि उद्योग स्थानीयकृत, सस्ते पदार्थों के साथ आगे बढ़ेंगे।

–केसरिया न्यूज़

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