भारतीय कंपनियां अमेरिकी हाईटेक कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर करें: नितिन गडकरी

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नई दिल्ली, (केसरिया न्यूज़)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कंपनियों को नवीनतम तकनीकों तक पहुंच हासिल करने के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर) करने की जरूरत है।

अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स के वार्षिक लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, “भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि अमेरिकी कंपनियां नई तकनीकों का विकास कर रही हैं। ऐसे में भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिकी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर करना बेहद जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय हाईवे परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में अमेरिकी कंपनियों से परामर्श लेने पर भी विचार कर रहा है। गडकरी ने कहा कि लॉजिस्टिक्स में सप्लाई चेन सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है और एक्सप्रेसवे तथा आर्थिक कॉरिडोर के तेजी से विस्तार के कारण भारत में लॉजिस्टिक्स लागत अब एकल अंक (सिंगल डिजिट) तक पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि आईआईटी चेन्नई, आईआईटी कानपुर और आईआईएम बेंगलुरु द्वारा तैयार ताजा अध्ययन के अनुसार, एक्सप्रेसवे और आर्थिक कॉरिडोर के निर्माण से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत 16 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय देशों में लॉजिस्टिक्स लागत 12 प्रतिशत है, जबकि चीन में यह 8 से 10 प्रतिशत के बीच है। गडकरी ने यह भी कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में भारत के ऑटोमोबाइल उद्योग को दुनिया में नंबर-1 बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

उन्होंने कहा, “जब मैंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था, तब भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार 14 लाख करोड़ रुपये था। अब यह बढ़कर 22 लाख करोड़ रुपये हो गया है।”

मंत्री ने बताया कि ऑटोमोबाइल सेक्टर लगभग 4 लाख युवाओं को रोजगार देता है और केंद्र तथा राज्यों को सबसे अधिक जीएसटी भी इसी क्षेत्र से प्राप्त होता है। वर्तमान में अमेरिका का ऑटोमोबाइल उद्योग 78 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि चीन का उद्योग 47 लाख करोड़ रुपये का है।

गडकरी ने कहा कि जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता आर्थिक बोझ बन गई है, क्योंकि ईंधन आयात पर हर साल 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। साथ ही यह पर्यावरण के लिए भी खतरा है। इसलिए देश के विकास के लिए स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में 10 हाईवे कॉरिडोर चिन्हित किए हैं, जहां ग्रीन हाइड्रोजन से चलने वाले ट्रकों का संचालन किया जाएगा।

इन मार्गों में ग्रेटर नोएडा-दिल्ली-आगरा, भुवनेश्वर-पुरी-कोणार्क, अहमदाबाद-वडोदरा-सूरत, साहिबाबाद-फरीदाबाद-दिल्ली, जमशेदपुर-कलिंगनगर, तिरुवनंतपुरम-कोच्चि और जामनगर-अहमदाबाद हाईवे शामिल हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स में 400 से अधिक अमेरिकी कंपनियां तथा व्यक्तिगत और मानद सदस्य शामिल हैं। भारत में अमेरिका के मौजूदा राजदूत इस संगठन के मानद अध्यक्ष होते हैं।

–केसरिया न्यूज़

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