पाकिस्तान में आतंकवाद बंद होने तक सिंधु जल संधि स्थगित रहेगी: भारत


नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। भारत ने सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को लेकर अपना रुख दोहराते हुए शुक्रवार को स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।

विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान द्वारा चिनाब-ब्यास लिंक टनल परियोजना और सलाल बांध जलाशय से गाद निकालने की भारत की योजनाओं पर आपत्ति जताए जाने के बाद आई है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारत पानी को “हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहा है।

नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान एमईए के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हमने सिंधु जल संधि को स्थगित कर रखा है और यह तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देता।”

जम्मू-कश्मीर में स्विट्जरलैंड के राजदूत की यात्रा पर पाकिस्तान की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर जायसवाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और स्विस राजदूत या किसी भी अन्य देश के राजदूत को वहां जाने की पूरी स्वतंत्रता है।

भारत ने पिछले महीने भी सिंधु जल संधि, 1960 के तहत कथित रूप से गठित तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन) के फैसले को खारिज करते हुए उसे “शून्य और अवैध” बताया था।

एमईए ने कहा था कि 15 मई 2026 को अवैध रूप से गठित तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय ने सिंधु जल संधि की व्याख्या और अधिकतम जल भंडारण क्षमता से जुड़े मामले में एक फैसला जारी किया था, जिसे भारत पूरी तरह अस्वीकार करता है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने कभी भी इस तथाकथित न्यायाधिकरण के गठन को मान्यता नहीं दी है। इसलिए इसकी कोई भी कार्यवाही, फैसला या आदेश भारत की नजर में कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

गौरतलब है कि सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को हस्ताक्षर हुए थे। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल उपयोग से संबंधित है।

पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने संप्रभु अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संधि को स्थगित करने का निर्णय लिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना विश्वसनीय और स्थायी रूप से बंद नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी।

विदेश मंत्रालय ने पहले भी कहा था कि संधि के स्थगन की अवधि में भारत उस संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं है। साथ ही किसी भी मध्यस्थता न्यायालय, विशेषकर भारत द्वारा अवैध माना जाने वाला न्यायाधिकरण, को भारत के संप्रभु निर्णयों की वैधता की समीक्षा करने का अधिकार नहीं है।

भारत ने पूर्व में जम्मू-कश्मीर में स्थित किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मामलों में भी तथाकथित मध्यस्थता न्यायालय द्वारा दिए गए फैसलों को खारिज करते हुए कहा था कि यह पूरा तंत्र ही सिंधु जल संधि का उल्लंघन है।

भारत का आरोप है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर जवाबदेही से बचने की कोशिश करता रहा है और यह तथाकथित मध्यस्थता प्रक्रिया भी उसी रणनीति का हिस्सा है।

–आईएएनएस

डीएससी


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