नई दिल्ली (केसरिया न्यूज़)। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने कहा कि भारत का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट की न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जो कि फिलहाल 8.8 गीगावाट है।
राष्ट्रीय राजधानी में एक कार्यक्रम के साइडलाइन में बोलते हुए प्रसाद ने कहा, “100 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कदमों की रूपरेखा तैयार करते हुए एक विस्तृत रोडमैप पहले ही तैयार किया जा चुका है, जिसमें विधायी सुधार एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।”
उन्होंने कहा,”प्रमुख उपलब्धियों में से एक – शांति अधिनियम का अधिनियमन – पहले ही पूरा हो चुका है।” हालांकि, उन्होंने आगे कहा कि इस ढांचे को क्रियान्वित करने के लिए नियम, प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश तैयार करने में अभी भी काफी काम बाकी है। उन्होंने आगे कहा कि न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता विस्तार को समर्थन देने के लिए ईंधन सुरक्षा, स्थान चयन और कुशल मानव संसाधन विकास जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में व्यापक भागीदारी की संभावना है।
वर्तमान में, न्यूक्लियर ऊर्जा उत्पादन पर एक ही कंपनी का वर्चस्व है, लेकिन प्रसाद ने कहा कि भविष्य में 10 से 12 कंपनियां इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकती हैं, जिससे क्षमता वृद्धि में तेजी आएगी। परिचालन पक्ष पर, उन्होंने न्यूक्लियर ऊर्जा की विश्वसनीयता और स्थिरता पर जोर देते हुए इसे आधारभूत बिजली का एक विश्वसनीय स्रोत बताया जो वर्षों तक निरंतर चल सकता है।
उन्होंने आगे कहा कि उचित प्रबंधन किए जाने पर न्यूक्लियर ऊर्जा बिजली उत्पादन के सबसे सुरक्षित और स्थिर रूपों में से एक बनी हुई है।
साथ ही, प्रसाद ने स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) जैसी उभरती टेक्नोलॉजी को एक अवसर और चुनौती दोनों के रूप में बताया, और कहा कि ये अभी भी वैश्विक स्तर पर विकास के चरण में हैं, लेकिन स्वच्छ ऊर्जा समाधानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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