चंडीगढ़, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। चंडीगढ़ में सेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट करने की धमकी देकर उनसे लगभग 3.5 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है।
चंडीगढ़ की एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि यह एक डिजिटल अरेस्ट का मामला है, जिसमें पीड़ित कर्नल को बताया गया कि उनका बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। इसके बाद एक कोर्ट का दृश्य उन्हें ऑनलाइन दिखाया गया, जिसमें एक जज और पुलिस अधिकारी थे। इस दौरान उन्हें यह धमकी दी गई कि अगर वे तुरंत पेमेंट नहीं करते हैं, तो उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया जाएगा।
पीड़ित कर्नल को डराया गया कि यदि वह पैसे नहीं देंगे, तो उनकी पूरी सेवा खराब हो जाएगी और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दबाव में कर्नल ने 10-12 दिन के भीतर 3.5 करोड़ रुपये की राशि गंवा दी। हालांकि, पुलिस ने कुछ रकम को फ्रीज करवा लिया है और ठगी की रकम को वसूलने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने यह भी बताया कि पहले ही निकाले गए पैसे को लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस मामले में आरोपियों को पहले से ही कर्नल के बारे में जानकारी थी और उन्होंने इसी जानकारी के आधार पर उन्हें टारगेट किया। पीड़ित को डराने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए गए थे। इस घटना के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करने के लिए एक विशेष मुहिम शुरू की है। इस मुहिम के तहत पुलिस उनके घर जाकर उन्हें साइबर अपराध के बारे में जानकारी देगी और उन्हें बताएगी कि कैसे वे ऐसे धोखाधड़ी के मामलों से बच सकते हैं। पुलिस ने कहा कि यह अभियान खासतौर पर अकेले रहने वाले सीनियर सिटीजन को ध्यान में रखते हुए चलाया जा रहा है।
एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने कहा कि पुलिस की प्राथमिकता यह है कि जितना अधिक हो सके ठगी गई रकम को वसूल किया जाए और अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह मामला इस बात का प्रतीक है कि साइबर अपराधियों के तरीके लगातार बदल रहे हैं, और इसे लेकर जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है।
–आईएएनएस
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