अगर शिवसैनिक पद छोड़ने को कहेंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा: उद्धव ठाकरे

[ad_1]

202601150431f vCdm1fU

मुंबई, 19 जून (आईएएनएस)। मुंबई में उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर पार्टी के भीतर चल रहे तीव्र मतभेदों पर संबोधन किया। इस दौरान उन्होंने उन धारणाओं को खारिज कर दिया कि वे सत्ता से चिपके रहने के लिए बेताब हैं।

छह लोकसभा सांसदों के विद्रोह का सामना करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने घोषणा की कि मैं राजनीति में बलपूर्वक पद पर बने रहने के लिए नहीं आया था। जब तक मेरे सामने खड़े लाखों शिवसैनिक चाहते हैं कि मैं नेतृत्व करूं, मैं लड़ता रहूंगा। लेकिन जिस क्षण आप, बालासाहेब की शिवसेना के सच्चे कार्यकर्ता, मुझसे कहेंगे कि अब जाने का समय आ गया है, मैं बिना किसी हिचकिचाहट के पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दूंगा।

उन्होंने वफादार पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपने संबंधों और दलबदल करने वाले सांसदों के कार्यों के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। उन्होंने इन सांसदों पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए बंद दरवाजों के पीछे सौदेबाजी करने और निजी लाभ के लिए अपनी निष्ठा बदलने का आरोप लगाया।

ठाकरे ने पार्टी की स्थापना दिवस रैली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट पर निशाना साधा।

यह भाषण ठाकरे खेमे में नए सिरे से फूट की खबरों के बीच आया, जिसमें कथित तौर पर छह सांसदों ने बागी रुख अख्तियार कर लिया है।

पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक ठाकरे ने दलबदल करने वाले नेताओं के कार्यों के लिए मतदाताओं से माफी मांगी और भीड़ को याद दिलाया कि इन व्यक्तियों ने पार्टी के जमीनी स्तर के समर्थन के बल पर चुनाव जीता था।

उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में आज यह विश्वासघात हुआ है, वहां के मतदाताओं से मैं माफी मांगता हूं। मोदी लहर के दौरान लोगों ने हम पर भरोसा करके इन व्यक्तियों को वोट दिया था। हमें लगातार ताने मारे जाते थे कि हमारे सांसद सिर्फ मोदी के चेहरे की वजह से जीते हैं, लेकिन इस बार हमारे नौ सांसद मोदी के चेहरे का इस्तेमाल किए बिना ही जीत गए। अब यह लगातार विधायकों की खरीद-फरोख्त क्यों? आप और क्या हासिल करना चाहते हैं? सत्ता के लिए कोई कितना भूखा हो सकता है?

अपने और अपने परिवार पर हो रहे लगातार राजनीतिक हमलों का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे ने 2019 में मुख्यमंत्री पद स्वीकार करने के अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि भाजपा द्वारा अपने वादे से मुकर जाने के बाद उन्हें यह पद स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने ठाकरे परिवार के आवास मातोश्री पर की जा रही चुनिंदा आलोचना पर सवाल उठाया।

ठाकरे ने जोर देकर कहा कि आज मुझे निशाना बनाया जा रहा है। मेरी पत्नी की आलोचना हो रही है, और आदित्य और तेजस को निशाना बनाया जा रहा है। मैंने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सिर्फ इसलिए स्वीकार की, क्योंकि भाजपा ने हमें धोखा दिया। क्या मातोश्री को ही सब कुछ सहना और भुगतना है? आप मंत्री बनते हैं, आप सांसद बनते हैं, आपके बच्चे विधायक बनते हैं, लेकिन मातोश्री से उम्मीद की जाती है कि वह कुछ न करें? हम ऐसी व्यवस्था नहीं चाहते।

उन्होंने राजनीतिक दलबदल को बढ़ावा देने वाले कथित प्रलोभनों पर तीखे प्रहार किए और महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र की दुर्दशा से इसकी तुलना की।

राजनीतिक भ्रष्टाचार पर ठाकरे ने कहा कि हमारे पार्टी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर मेहनत करते हैं, जबकि ये लोग रुपयों से भरे बक्सों का आनंद लेते हैं। राज्य के किसानों को उनकी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी/हमी भाव) नहीं मिल रहा है, लेकिन दलबदल करने वाले सांसदों का ‘समर्थन मूल्य’ तो मानो तय है।

फसल ऋण माफी पर ठाकरे ने राज्य के वित्तीय सहायता पैकेजों की आलोचना की।

ठाकरे ने कहा कि उन्होंने जो ऋण माफी दी है, वह पूरी तरह से धोखे वाली है। किसान कह रहे हैं कि वे ऐसी धोखाधड़ी वाली माफी स्वीकार करने के बजाय मरना पसंद करेंगे।

–आईएएनएस

एमएस/डीकेपी

[ad_2]

Related Articles

Latest News