अल नीनो से बढ़ सकता है भुखमरी का संकट, 5 करोड़ लोगों पर पड़ेगा असर: डब्ल्यूएफपी

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नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अल नीनो दुनिया पर कहर बनकर टूटने वाला है। अगले साल करीब 5 करोड़ लोग इस वेदर सिस्टम की वजह से ‘एक्यूट हंगर’ का सामना कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम यानी वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) ने बुधवार को यह चेतावनी जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, यह संकट उन करोड़ों लोगों के अतिरिक्त होगा जो पहले से ही अफ्रीका के कई हिस्सों में लंबे समय से पड़े सूखे और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण बढ़ी खाद्य कीमतों की वजह से खाद्य असुरक्षा झेल रहे हैं।

डब्ल्यूएफपी के मुताबिक, अनुमान है कि भले ही मौजूदा अल नीनो कुछ मॉडलों की तुलना में कम तीव्र साबित हो, फिर भी इससे 45 देशों में पहले से तीव्र खाद्य असुरक्षा झेल रहे 22.5 करोड़ लोगों की संख्या में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है।

विश्लेषण के मुताबिक सबसे गंभीर प्रभाव मध्य और दक्षिण अमेरिका, कैरेबियाई देश और दक्षिणी अफ्रीका में दिख सकता है। वहीं, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है, जिससे खेती, सिंचाई और किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अल नीनो प्रशांत महासागर में हर कुछ वर्षों में विकसित होने वाली प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो दुनिया भर में वर्षा और तापमान के पैटर्न को प्रभावित करती है। इस वर्ष विकसित हो रही अल नीनो को पिछले लगभग 70 वर्षों की सबसे शक्तिशाली घटनाओं में से एक माना जा रहा है। हालांकि “सुपर अल नीनो” शब्द का आधिकारिक उपयोग नहीं किया जाता, लेकिन कई विशेषज्ञ इसकी असाधारण तीव्रता की ओर संकेत कर रहे हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अल नीनो के प्रभाव और भी अधिक गंभीर हो रहे हैं। इसके चलते 2026 या 2027 में वैश्विक तापमान नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।

डब्ल्यूएफपी ने कहा कि वह समय रहते चेतावनी प्रणाली और अग्रिम राहत कार्यक्रमों के माध्यम से नुकसान कम करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए लगभग 8 करोड़ डॉलर का प्रावधान किया गया है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों पर इसका असर कई मौसमों तक बना रह सकता है। उदाहरण के लिए, दक्षिणी अफ्रीका में अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 तक की खेती के बाद वास्तविक खाद्य संकट 2027-28 के ‘लीन सीजन’ (जब पिछली फसल समाप्त हो जाती है और नई फसल तैयार नहीं होती) के दौरान सबसे अधिक महसूस होगा।

डब्ल्यूएफपी के जलवायु एवं लचीलापन सेवा निदेशक रिचर्ड शौलार्टन के अनुसार, दक्षिणी अफ्रीका में सबसे गंभीर खाद्य सुरक्षा संकट 2027-28 के दौरान देखने को मिल सकता है। डब्ल्यूएफपी के खाद्य सुरक्षा निदेशक जीन-मार्टिन बाउर ने कहा कि 2025 के अंत तक खाद्य कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित थीं, लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण उन पर फिर से दबाव बढ़ने लगा है।

उन्होंने यह भी आगाह किया कि यदि बड़े कृषि निर्यातक देश खाद्यान्न निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो वैश्विक खाद्य कीमतों में और तेजी आ सकती है तथा गरीब देशों में खाद्य उपलब्धता प्रभावित होगी।

डब्ल्यूएफपी के अनुसार, 2015-16 के अल नीनो के दौरान दुनिया भर में 6 से 10 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से प्रभावित हुए थे। इस बार संस्था को उम्मीद है कि पहले से लागू चेतावनी और अग्रिम राहत तंत्र के कारण नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकेगा, हालांकि वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कई क्षेत्रों में आवश्यक डेटा संग्रह प्रभावित हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अल नीनो का असर केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं रहेगा। यूरोप और ब्रिटेन में भी अत्यधिक गर्मी और कम वर्षा के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

–आईएएनएस

केआर/

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