नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। हबल स्पेस टेलीस्कोप को अक्सर ब्रह्मांड की एक टाइम मशीन कहा जाता है। यह दूर स्थित ब्रह्मांडीय पिंडों से आने वाली रोशनी को कैद करके हमें समय में पीछे की यात्रा भी कराता है। रोशनी को हबल तक पहुंचने में समय लगता है, इसलिए जो तस्वीरें आज हम देखते हैं, वे उन पिंडों को वर्षों या अरबों वर्ष पहले का रूप दिखाती हैं।
खास बात है कि खगोल विज्ञान को ब्रह्मांडीय पुरातत्व विज्ञान भी कहा जा सकता है। रोशनी के माध्यम से हमें उन पिंडों के जीवन और ब्रह्मांड के विकास के रहस्यों का पता चलता है।हबल जैसे टेलीस्कोप हमें यह समझने में मदद करते हैं कि हम ब्रह्मांड में कहां हैं और यह कैसे काम करता है। यह सिर्फ तस्वीरें नहीं लेता, बल्कि समय के किनारे तक हमें ले जाता है। वैज्ञानिक हबल के डेटा का उपयोग करके ब्रह्मांड के इतिहास को जोड़ते हैं और उसके अनसुलझे सवालों के जवाब ढूंढते हैं।
हबल स्पेस टेलीस्कोप सिर्फ एक दूरबीन नहीं है। यह एक वेधशाला, एक उपग्रह और वैज्ञानिक-सांस्कृतिक प्रतीक भी है। यह पृथ्वी की निचली कक्षा में करीब 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर घूमता है। यहां से एक पूरा चक्कर लगाने में लगभग 95-96 मिनट लगते हैं। पृथ्वी के धुंधले वातावरण से ऊपर होने के कारण हबल ब्रह्मांड के साफ और अद्भुत नजारे कैद कर पाता है।
इसके टाइम जर्नी का रहस्य रोशनी में छिपा है। खगोल विज्ञान में ‘प्रकाश-वर्ष’ एक दूरी की इकाई है। यह वह दूरी है जो रोशनी एक साल में तय करती है। रोशनी की गति लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड है। एक प्रकाश-वर्ष में रोशनी करीब 9.5 ट्रिलियन किलोमीटर की दूरी तय कर लेती है। उदाहरण के लिए, सूरज पृथ्वी से करीब 15 करोड़ किलोमीटर दूर है। इसकी रोशनी हमें पहुंचने में लगभग 8 मिनट लगते हैं। इसलिए जब हम सूरज को देखते हैं, तो हम उसे 8 मिनट पहले जैसा देखते हैं। ब्रह्मांड के पैमाने पर यह दूरी बहुत छोटी है। सूरज के बाद सबसे करीबी तारा प्रॉक्सिमा सेंटॉरी है, जो करीब 4.2 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है।
हबल की शक्तिशाली नजर में भी यह एक छोटा बिंदु ही दिखता है। इससे ब्रह्मांड की विशालता का अंदाजा लगता है। जब हबल हमारे सौर मंडल से बहुत दूर की चीजों को देखता है, तो समय यात्रा और रोमांचक हो जाती है। जीएन-जेड-11 नाम की आकाशगंगा ब्रह्मांड की सबसे दूर की ज्ञात आकाशगंगाओं में से एक है। इसकी रोशनी तक हमें पहुंचने में 13.4 अरब वर्ष लगे हैं। इसका मतलब है कि हबल हमें उस आकाशगंगा को देखने देता है जैसी वह बिग बैंग के महज 400 मिलियन वर्ष बाद थी, जब ब्रह्मांड अपनी वर्तमान उम्र का केवल 3 प्रतिशत था।
इसी तरह, ‘ईयरेंडेल’ नाम का तारा हबल द्वारा देखा गया जो सबसे दूर का तारा है। इसकी रोशनी 12.9 अरब वर्ष पुरानी है। जब यह रोशनी निकली थी, तब ब्रह्मांड अपनी वर्तमान उम्र का महज 7 प्रतिशत था। वैज्ञानिकों को इन दूर के अवलोकनों से ब्रह्मांड के शुरुआती दौर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। हबल हमें ब्रह्मांड के शुरुआती समय तक की झलक दिखाता है।
–आईएएनएस
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