मुंबई, 16 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को राज्य सरकार द्वारा महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल पेश करने के कदम का बचाव किया, जिसका उद्देश्य राज्य में अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाना है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक विशेष रूप से तब पेश किया गया है जब ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं को कथित तौर पर रिश्तों में फंसाकर, शादी कराकर बाद में छोड़ दिया गया।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने पत्रकारों से कहा कि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां महिलाओं को बहला-फुसलाकर ले जाया गया और शादी के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। ऐसी स्थिति में, उनके बच्चों का भविष्य अनिश्चित हो जाता है। इससे उनका जीवन जटिल हो जाता है। यह विधेयक ऐसी समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास कर रहा है।
हालांकि, उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई आंकड़े पेश नहीं किए।
उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी दलों ने विधेयक को ध्यान से पढ़ा होता, तो उन्हें पता चलता कि यह किसी विशेष समुदाय को निशाना नहीं बनाता, बल्कि प्रलोभन, दबाव या प्रलोभन के माध्यम से किए जाने वाले जबरन धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष केवल अपने वोट बैंक की राजनीति के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहा है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि विधेयक को ध्यान से पढ़ने के बाद विपक्ष इस पर आपत्ति नहीं करेगा।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र ऐसा कानून लाने वाला पहला राज्य नहीं है, और कई राज्यों ने पहले ही गैरकानूनी धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के लिए इसी तरह के कानून बनाए हैं।
राज्य सरकार ने 13 मार्च को राज्य विधानसभा में महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026 पेश किया था, जिसका उद्देश्य बल, दबाव, प्रलोभन, गलतबयानी या अन्य कपटपूर्ण तरीकों से किए गए गैर-कानूनी धर्मांतरण पर रोक लगाना है।
महाराष्ट्र के गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने 13 मार्च को यह विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना, धर्मांतरण को विनियमित करना और गैर-कानूनी धर्मांतरण के मामलों में दंड का प्रावधान करना है।
–आईएएनएस
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