नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। सरकार ने शनिवार को बताया कि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के लिए शुरू की गई क्रेडिट गारंटी स्कीम 2.0 से लगभग 36 लाख उधारकर्ताओं को फायदा मिलने का अनुमान है।
इस योजना का नाम ‘क्रेडिट गारंटी स्कीम फॉर माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूशंस-2.0’ है, जिसके तहत बैंकों और वित्तीय संस्थानों को गारंटी कवर दिया जाएगा। यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के जरिए दी जाएगी, ताकि माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को दिए गए कर्ज पर होने वाले संभावित नुकसान को कवर किया जा सके।
इस योजना के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहन मिलेगा कि वे एनबीएफसी-एमएफआई और अन्य माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को ज्यादा कर्ज दें, ताकि ये संस्थान आगे छोटे उधारकर्ताओं को लोन दे सकें।
इस योजना के तहत करीब 20,000 करोड़ रुपए तक का कर्ज प्रवाह बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, छोटे उधारकर्ताओं को कर्ज देने के लिए गारंटी कवर दिया जाएगा, जिसमें डिफॉल्ट होने की स्थिति में छोटे संस्थानों के लिए 80 प्रतिशत, मध्यम के लिए 75 प्रतिशत और बड़े संस्थानों के लिए 70 प्रतिशत तक की गारंटी मिलेगी।
यह योजना भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए माइक्रोफाइनेंस नियमों के अनुसार नए और पुराने छोटे उधारकर्ताओं को कवर करेगी।
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर देश में वित्तीय समावेशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन लोगों तक कर्ज पहुंचाता है जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में आते हैं।
सरकार के अनुसार, हाल के समय में माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में वित्तीय दबाव बढ़ने के कारण बैंकों ने कर्ज देना धीमा कर दिया है, जिससे छोटे संस्थानों को लोन मिलने में दिक्कत हो रही है।
इस योजना का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों को प्रोत्साहित करना है कि वे माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को कर्ज दें, ताकि छोटे उधारकर्ताओं तक आसानी से पैसा पहुंच सके।
यह योजना 30 जून 2026 तक लागू रहेगी या तब तक, जब तक 20,000 करोड़ रुपए तक के कर्ज पर गारंटी नहीं दी जाती, जो भी पहले हो।
–आईएएनएस
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