गांधीनगर, 12 मई (आईएएनएस)। विकसित देशों और भारत की स्वास्थ्य प्रणालियों की तुलना करते हुए गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने मंगलवार को कहा कि विकसित देशों में अक्सर इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जबकि गुजरात की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली सेवाओं के माध्यम से त्वरित उपचार प्रदान करती है।
उन्होंने ये बातें गांधीनगर के जीएमईआरएस मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल में आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस’ समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।
यह कार्यक्रम आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक मानी जाने वाली फ्लोरेंस नाइटिंगेल की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
पंशेरिया ने कहा कि नर्सिंग को केवल तकनीकी दक्षता से ही नहीं, बल्कि रोगियों के साथ व्यवहार और संवाद से भी परिभाषित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट आचरण ही नर्सिंग पेशे की सच्ची पहचान है। उन्होंने आगे कहा कि अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सा उपचार के साथ-साथ भावनात्मक सहारे की भी उतनी ही आवश्यकता होती है।
अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में उन्नत बुनियादी ढांचे के बावजूद, व्यवस्थित प्रतीक्षा सूचियों के कारण मरीजों को अक्सर उपचार मिलने में देरी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने इसकी तुलना गुजरात की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली से करते हुए कहा कि 108 एम्बुलेंस और सरकारी अस्पतालों जैसी प्रणालियों का उद्देश्य गंभीर मामलों में समय पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
मंत्री ने कोविड-19 महामारी का भी जिक्र किया और कहा कि संकट के दौरान स्वास्थ्य देखभाल संबंधी दबावों को संभालने में गुजरात के नर्सिंग स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि कोविड काल में, जब विकसित देशों की स्वास्थ्य प्रणालियां संघर्ष कर रही थीं, तब गुजरात की नर्सें ‘हजारों फ्लोरेंस नाइटिंगेल’ बनकर लोगों की जान बचाईं।
स्वास्थ्य मंत्री आगे कहा कि उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम किया और उस समय जीवन बचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जब कई विकसित देशों को भी स्वास्थ्य सेवाओं में सीमाओं का सामना करना पड़ रहा था।
–आईएएनएस
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