5 साल की उम्र में मिलीं जिम्मेदारियां, स्कूल की जगह फिल्मों के सेट पर बीता था सारिका का बचपन


मुंबई, 2 जून (आईएएनएस)। फिल्मी दुनिया में अभिनेत्री सारिका ने बचपन में ही जिम्मेदारियों का बोझ अपने कंधों पर ले लिया था। जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं, खेलते हैं और अपने सपने बुनते हैं, उस उम्र में सारिका को परिवार का सहारा बनना पड़ा। यही संघर्ष आगे चलकर उनकी पहचान बना और उन्होंने अपने दम पर हिंदी सिनेमा में एक खास मुकाम हासिल किया। अभिनय से लेकर कॉस्ट्यूम डिजाइन तक, उन्होंने कई क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखाई और राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते।

सारिका का जन्म 3 जून 1960 को नई दिल्ली में हुआ था। जब वह छोटी थीं, तब उनके पिता परिवार से अलग हो गए थे। ऐसे में सारिका को महज पांच साल की उम्र में ही काम करना पड़ा। परिवार की मदद करने के लिए उन्होंने फिल्मों में काम शुरू किया। इसी वजह से वह स्कूल नहीं जा सकीं। हालांकि पढ़ाई का मौका कम मिला, लेकिन उन्होंने जिंदगी से बहुत कुछ सीखा और मेहनत को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया।

सारिका ने बाल कलाकार के रूप में कई फिल्मों में लड़के के किरदार निभाए। बड़े होने के बाद सारिका ने मुख्य अभिनेत्री के रूप में भी काम किया। उन्हें फिल्म ‘गीत गाता चल’ से खास पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया, जिसमें ‘आशीर्वाद’, ‘छोटी बहू’, ‘जिद’, ‘वंदना’, ‘गृह प्रवेश’ और ‘खुशबू’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं। अपनी सादगी के कारण वह दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहीं।

सारिका का निजी जीवन भी अक्सर चर्चा में रहा। उनका नाम अभिनेता कमल हासन के साथ जुड़ा। दोनों लंबे समय तक लिव-इन में रहे और बाद में शादी कर ली। उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें श्रुति हासन आज फिल्म जगत का जाना-पहचाना नाम हैं और दूसरी अक्षरा हासन। श्रुति हासन का जन्म शादी से पहले हो गया था। उसके बाद अक्षरा हासन का जन्म हुआ। साल 1988 में कमल हासन और सारिका ने शादी की और 2004 में अलग हो गए।

अभिनय के अलावा सारिका ने पर्दे के पीछे भी कई काम किया। उन्होंने कॉस्ट्यूम डिजाइन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाई। फिल्म ‘हे राम’ के लिए उनके काम को काफी सराहना मिली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइन का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

इसके बाद फिल्म ‘परजानिया’ में उनके दमदार अभिनय ने सभी का ध्यान खींचा। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला।

–आईएएनएस

पीके/डीएससी


Related Articles

Latest News