Wednesday, February 18, 2026

गिफ्ट सिटी और अरुण जेटली नेशनल इंस्टीट्यूट ने वित्तीय क्षेत्र में टैलेंट बढ़ाने के लिए साझेदारी का किया ऐलान


नई दिल्ली, 18 फरवरी (आईएएनएस)। देश के वित्तीय क्षेत्र में टैलेंट को बढ़ाने के लिए गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) ने अरुण जेटली नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट (एजेएनआईएफएम) के साथ बुधवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है।

इसके जरिए दोनों संस्थानों की कोशिश गिफ्ट इंटरनेशनल फिन टेक इंस्टीट्यूट में क्षमता निर्माण अंतर्राष्ट्रीय वित्त, शासन और वित्तीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शैक्षणिक सहभागिता और ज्ञान का आदान-प्रदान करना है।

गिफ्टी सिटी की ओर से जारी गई प्रेस रिलीज में कहा गया कि यह साझेदारी भारत के इकलौते इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) इकोसिस्टम की बदलती आवश्यकताओं के साथ उन्नत वित्तीय शिक्षा को संरेखित करने के लिए बनाई गई है, जो गिफ्ट सिटी में स्थित है।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एजेएनआईएफएम नीति-उन्मुख वित्त शिक्षा और क्षमता निर्माण में व्यापक अनुभव रखती है, जिसमें प्रमुख सरकारी वित्तीय और लेखा सेवाओं के अधिकारियों को प्रशिक्षण देना और वित्त, प्रबंधन और सार्वजनिक नीति में स्नातकोत्तर और कार्यकारी कार्यक्रम प्रदान करना शामिल है।

यह संस्थागत क्षमता गिफ्ट सिटी के तेजी से विस्तारित वित्तीय सेवा इकोसिस्टम को पूरक बनाती है और सहयोग के व्यावहारिक दृष्टिकोण को बढ़ाती है।

गिफ्ट सिटी के प्रबंध निदेशक और समूह सीईओ संजय कौल ने कहा, “एजेएनआईएफएम के साथ हमारी साझेदारी उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवाओं और फिनटेक में क्षमता निर्माण को मजबूत करने के प्रति गिफ्ट सिटी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इंडस्ट्री इमर्सन प्रोग्राम जैसी पहलों के माध्यम से, हमारा लक्ष्य ऐसे कुशल पेशेवरों को तैयार करना है जो भारत के आईएफएस पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक वित्तीय बाजारों में सार्थक योगदान देने में सक्षम हों।”

एजेएनआईएफएम के निदेशक प्रवीण कुमार ने कहा, “जीआईएफटी सिटी के साथ यह सहयोग वित्त और शासन में उन्नत स्नातकोत्तर शिक्षा को सह-डिजाइन करने और प्रदान करने के लिए एक रणनीतिक साझेदारी स्थापित करता है। यह सहयोग संकाय और छात्रों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा, सहयोगात्मक शिक्षण को गहरा करेगा और दोनों संस्थानों को वित्त और शासन में अपनी विशेषज्ञता को और मजबूत करने में सक्षम बनाएगा।”

–आईएएनएस

एबीएस/


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