लखनऊ, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए बिजली व्यवस्था और महिला आरक्षण जैसे अहम मुद्दों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘प्रीपेड पीड़ित’ नाम की एक नई श्रेणी पैदा हो गई है, जबकि बिना नई जनगणना के महिला आरक्षण लागू करने की बात पूरी तरह भ्रामक है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार के गलत फैसलों के कारण उत्तर प्रदेश में ‘प्रीपेड पीड़ित’ की नई समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर की खामियों के चलते प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं की बिजली अचानक कट जा रही है, जिससे लोग भीषण गर्मी में अंधेरे में रहने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि जब उपभोक्ता पहले ही बिजली का पैसा जमा कर देते हैं तो फिर उन्हें परेशान करने का कोई औचित्य नहीं है। बिजली कंपनियों को पहले ही भुगतान मिल जाने के बावजूद आम जनता की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। जनता दर-दर भटक रही है, लेकिन सरकार और कंपनियों के बीच मिलीभगत के कारण उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।
सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा शासन में जनता ‘उपभोक्ता’ नहीं, बल्कि ‘उपभुगता’ बन गई है, जिसे सरकार की नीतियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का दायरा लगातार बढ़ रहा है और अब ‘प्रीपेड पीड़ित’ भी इसमें जुड़ रहे हैं। महिला आरक्षण के मुद्दे पर सपा मुखिया ने कहा कि अगर गिनती ही गलत होगी तो आरक्षण कैसे सही होगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण का आधार कुल सीटों का एक-तिहाई है तो यह पूरी तरह गणित का विषय है और गणित का आधार सटीक आंकड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि 2011 की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर महिला आरक्षण तय करना गलत है। जब आधार ही कमजोर होगा तो परिणाम भी सही नहीं होंगे। सपा की मांग है कि पहले नई जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर कोई ठोस निर्णय लिया जाए।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जो सरकार महिलाओं की सही गिनती नहीं करना चाहती, वह उन्हें वास्तविक अधिकार भी नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ किसी भी तरह का छलावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जब तक नई जनगणना नहीं होती, तब तक महिला आरक्षण पर बहस करना भी उचित नहीं है।
–आईएएनएस
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