नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। शरीर से पसीना आना आम बात है, लेकिन अक्सर लोग इसे सिर्फ गर्मी या मेहनत से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो हमें स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है। मेडिकल रिसर्च के अनुसार, पसीना सिर्फ शरीर को ठंडा ही नहीं करता, बल्कि कई आंतरिक प्रक्रियाओं को संतुलित रखने में भी मदद करता है। हालांकि, जब यह सामान्य से ज्यादा होने लगे तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है।
वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, पसीना हमारे शरीर के तापमान को नियंत्रित करने का एक तरीका है, जिसे थर्मोरेगुलेशन कहा जाता है। जब शरीर का तापमान बढ़ता है, तब त्वचा में मौजूद स्वेट ग्लैंड्स सक्रिय हो जाती हैं। ये ग्रंथियां पानी और नमक से बना एक तरल पदार्थ, यानी पसीना, बाहर निकालती हैं। जब यह पसीना त्वचा से भाप बनकर उड़ता है तो शरीर की गर्मी कम हो जाती है और हमें ठंडक महसूस होती है। यही कारण है कि दौड़ने, काम करने या धूप में रहने पर पसीना ज्यादा आता है।
पसीना आना दिल की धड़कन और मेटाबॉलिज्म से भी जुड़ा होता है। जब हम शारीरिक गतिविधि करते हैं तो शरीर ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, जिससे गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को संतुलित करने के लिए शरीर पसीना निकालता है। यह प्रक्रिया हमें ओवरहीट होने से बचाती है और शरीर को सुरक्षित रखती है।
लेकिन हर बार ज्यादा पसीना आना सामान्य नहीं होता। अगर बिना किसी खास वजह के बहुत ज्यादा पसीना आने लगे, तो यह हाइपरहाइड्रोसिस नाम की स्थिति का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में व्यक्ति को इतना ज्यादा पसीना आता है कि कपड़े भीग जाते हैं या हाथों से पसीना टपकने लगता है। यह समस्या सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि इससे आत्मविश्वास कम होता है और सामाजिक स्थिति में असहजता महसूस होती है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में यह जेनेटिक समस्या हो सकती है, जबकि कई बार यह हार्मोनल बदलाव, थायरॉयड, डायबिटीज या कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट की वजह से भी हो सकता है। इसलिए अगर पसीना जरूरत से ज्यादा आ रहा है तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
–आईएएनएस
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