राम मंदिर पर ईडी और सीबीआई चुप क्यों, लोगों ने आस्था से दिया दान, पारदर्शिता जरूरी: मोहिबुल्लाह नदवी

[ad_1]

202607073854661

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति, उत्तर प्रदेश में जलालाबाद तहसील का नाम बदलने तथा इतिहास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि धार्मिक मामलों को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और कानून का समान रूप से पालन होना चाहिए।

राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित विवाद पर नदवी ने कहा कि भगवान राम के प्रति सम्मान केवल हिंदू समाज तक सीमित नहीं है। उन्होंने अल्लामा इकबाल के प्रसिद्ध शेर का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम भारतीय सभ्यता के महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। उनका कहना था कि यदि चंदे या चढ़ावे से जुड़े किसी भी प्रकार के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और अन्य जांच एजेंसियां सक्रिय क्यों नहीं दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि लोगों ने भगवान राम के नाम पर विश्वास के साथ दान दिया है, इसलिए पूरे मामले में पारदर्शिता आवश्यक है।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के संबंध में पूछे गए सवाल पर नदवी ने कहा कि सभी भारतीयों को धार्मिक मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए। उनके अनुसार, गलत कार्य चाहे किसी भी धर्म या व्यक्ति द्वारा किया जाए, उसे गलत ही माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सांप्रदायिक विवादों से ऊपर उठना होगा।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद तहसील का नाम बदलकर ‘भगवान परशुराम पुरी’ किए जाने के फैसले पर नदवी ने दावा किया कि इतिहास को लेकर एक विशेष नैरेटिव तैयार किया गया है, जिससे हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच दूरी बढ़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम में लालच या भय के आधार पर धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि मंदिरों को जबरन मस्जिदों में बदले जाने संबंधी आरोप ऐतिहासिक रूप से सही नहीं हैं।

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की नियुक्ति के मुद्दे पर नदवी ने कहा कि किसी भी समुदाय के धार्मिक मामलों में दूसरे समुदाय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों के बावजूद सरकार ने संबंधित कानून लागू किया, जिसके बाद कई मस्जिदों पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि संविधान, कानून के शासन और न्याय के सिद्धांतों का पालन ही देश की एकता, अखंडता और विकास के लिए आवश्यक है।

–आईएएनएस

एसएके/एएस

[ad_2]

Related Articles

Latest News