संयुक्त राष्ट्र, 10 जुलाई (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल और इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) और आसपास के इलाकों में इबोला को रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की अपील की है।
फ्लेचर ने गुरुवार को एक बयान में कहा, “हमें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला की कमर तोड़ने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है। इतुरी प्रांत इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वायरस दूसरे प्रांतों में भी फैल रहा है, जहां संघर्ष और लोगों की लगातार आवाजाही से इसके और फैलने का खतरा बढ़ जाता है।”
उन्होंने बताया कि 15 मई को प्रकोप की घोषणा के बाद से डीआरसी में 1,700 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए हैं और 600 लोगों की मौत हो चुकी है। युगांडा में भी 20 मामलों की पुष्टि हुई है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने गुरुवार को पूर्वी इतुरी प्रांत की राजधानी बूनिया में कहा कि डीआरसी में चल रहा इबोला का प्रकोप अभी भी “बहुत सक्रिय” चरण में है। बूनिया ही इस प्रकोप का केंद्र है।
ज्यादा आबादी घनत्व, लोगों की लगातार आवाजाही और स्थानीय कारकों का हवाला देते हुए, जिनसे समुदाय को जोड़ने में मुश्किल होती है, काम्बा ने कहा कि यह बताना अभी जल्दबाजी होगी कि प्रकोप कब अपने चरम पर पहुंचेगा।
फ्लेचर ने कहा, “यह सिर्फ एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से कहीं ज्यादा है।” उन्होंने बताया कि इबोला के प्रकोप से पहले ही लाखों लोग संघर्ष, भुखमरी, विस्थापन, कमजोर बुनियादी सेवाओं और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं का सामना कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इबोला से निपटने के अपने प्रयासों को बढ़ा रहा है और दूसरे लोगों/संस्थाओं को भी उतनी ही तेजी से काम करने की जरूरत है।
फ्लेचर ने कहा, “सभी पक्षों को मानवीय और स्वास्थ्य कर्मियों, जरूरी सामान और राहत उपकरणों की सुरक्षित और लगातार पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। सीमाएं और सप्लाई रूट खुले रहने चाहिए। दान देने वालों को यह पक्का करना चाहिए कि वादा किया गया फंड तेजी से और आसानी से राहत कार्य करने वालों तक पहुंचे। हमें इबोला से निपटने के प्रयासों और उस बड़े मानवीय अभियान, जिस पर कमजोर समुदाय निर्भर हैं, दोनों का समर्थन करना चाहिए।”
डीआरसी के संचार और मीडिया मंत्रालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया एक्स पर ताजा जानकारी पोस्ट की, जिसमें 1,792 कन्फर्म मामलों और 625 मौतों की रिपोर्ट दी गई। कुल 764 मरीज अभी आइसोलेशन या अस्पताल में हैं, जबकि 295 मरीज ठीक हो चुके हैं। कुल मिलाकर मृत्यु दर 34.1 प्रतिशत रही।
–आईएएनएस
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