उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद करने के लिए इस समय प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ (Zero Tolerance Policy) जहां जमीन पर भू-माफियाओं और बाहुबलियों का आर्थिक साम्राज्य ध्वस्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में पैर पसारते ‘गन कल्चर’ और रसूखदारों को मिले शस्त्र लाइसेंसों पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
बुलडोजर और कुर्की
अवैध रूप से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करने और ध्वस्त करने के अभियान को और तेज किया जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ, प्रयागराज समेत कई जिलों में माफियाओं की सौ करोड़ से अधिक की संपत्तियां पहले ही कुर्क की जा चुकी हैं।
जमानत पर बाहर आए अपराधियों पर कसता शिकंजा
मुख्यमंत्री ने हाल ही में गोरखपुर में आयोजित ‘जनता दर्शन’ के दौरान अधिकारियों को एक और बड़ा निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोर्ट से जमानत (Bail) पर छूटा कोई भी अभियुक्त या दबंग किसी पीड़ित या गवाह को डराने-धमकाने का दुस्साहस करता है, तो पुलिस तुरंत उसकी जमानत निरस्त (Cancel) कराने के लिए कानूनी कदम उठाए।
सीएम योगी का अल्टीमेटम – “यूपी में दबंगई दिखाई तो खैर नहीं”
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि “यूपी में दबंगई दिखाई तो खैर नहीं, माफियाओं का साम्राज्य हर हाल में नेस्तनाबूद किया जाएगा।” मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी निर्देशों के मुताबिक, अब अपराधियों के खिलाफ केवल मुकदमे दर्ज करना काफी नहीं है, बल्कि उनके “आर्थिक साम्राज्य” को पूरी तरह से ध्वस्त करना सरकार की प्राथमिकता है। यदि कोई भी दबंग या भू-माफिया किसी गरीब या कमजोर वर्ग की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव के तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
जांच के घेरे में बड़े नाम: बृजभूषण शरण सिंह, रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, सुशील सिंह, विनीत सिंह।
जोनल माफियाओं पर शिकंजा: कोर्ट ने नोएडा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जोन के कुख्यात चेहरों जैसे अब्बास अंसारी, हाजी याकूब कुरैशी, सुंदर सिंह भाटी, विजय मिश्रा, कुंटू सिंह और राजन तिवारी की भी आपराधिक पृष्ठभूमि (कुंडली) और हथियारों की जांच के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी कि “शस्त्र लाइसेंस के आवंटन, नवीनीकरण और हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों में कई महत्वपूर्ण जानकारियां जानबूझकर छिपाई जा रही हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
चौंकाने वाले सरकारी आंकड़े: जिन पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने जो आंकड़े आए, उन्होंने सबको चौंका दिया। उत्तर प्रदेश में हथियारों का यह नेटवर्क कोर्ट की रडार पर है:
| विवरण | सरकारी आंकड़े |
| प्रदेश में कुल एक्टिव शस्त्र लाइसेंस | 10,08,953 |
| वर्तमान में लंबित आवेदन | 23,407 |
| 2 या अधिक मुकदमों वाले दागी लाइसेंस धारक | 6,062 |
| एक से ज्यादा लाइसेंस वाले परिवार | 20,960 |
हाईकोर्ट ने सभी पुलिस कप्तानों (SP/SSP) और पुलिस कमिश्नरों को सख्त हिदायत दी है कि वे शपथ-पत्र के साथ यह लिखित आश्वासन देंगे कि कोई जानकारी छिपाई नहीं गई है। तथ्य छिपाने पर अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
न्याय के साथ मानवीय चेहरा: बीमारों को तुरंत मिलेगी मदद
एक तरफ जहां मुख्यमंत्री और न्यायपालिका अपराधियों के खिलाफ वज्र बनकर टूटे हैं, वहीं आम जनता के प्रति संवेदनशीलता भी बरकरार है। सीएम योगी ने जनता दर्शन में गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को आश्वस्त किया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को तुरंत एस्टीमेट बनाकर भेजने को कहा ताकि ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ से तत्काल आर्थिक सहायता जारी की जा सके।
